Mukhiyajee / Patna : मौसम पूरी तरह बदल चुका है। कोहरे वाला मौसम आ गया है। शीतलहरी की चपेट में बिहार समेत पूरा उत्तर भारत आ गया है। बिहार के भी तमाम जिलों में कनकनी बढ़ गयी है। इससे बचाव के लिए लोग स्वेटर से लेकर जैकेट तक पहन रहे हैं। मफलर से लेकर शॉल तक से खुद को लपेट रहे हैं। लोग न केवल रजाई के अंदर दुबक रहे हैं, बल्कि रूम हीटर तक का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे गरम पानी तक से नहा रहे हैं। लेकिन, मवेशी खुद को कैसे बचाए, यह बड़ा सवाल है ? खासकर गाय, भैंस, बकरी आदि गांवों में काफी संख्या में पाले जाते हैं। बहुत से घरों में कुत्ते भी पाले जाते हैं। कुछ लोग बिल्ली पालने के भी शौकीन होते हैं। ऐसे में पशुपालकों को ही अपने मवेशियों को शीतलहरी से बचाने के लिए आगे आना होगा।


दरअसल, बिहार में बढ़ती शीतलहर से मवेशियों को बचाने के लिए डेयरी मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने पिछले माह दिसंबर में सलाह जारी की थी। मवेशी पालकों को जागरूक करने के उद्देश्य से मुखियाजी डॉट कॉम उसे सलाह को दोबारा प्रकाशित कर रहा है, क्योंकि मवेशी भी इंसान की तरह है। विभाग की ओर से जारी सलाह में कहा गया है कि पशुपालक सर्दियों में पशुओं को नमी और धुएं से बचाएं। साथ ही, मवेशियों को खुरपका मुंहपका, पीपीआर, इन्टेरोट्रॉकसीमिया आदि रोगों से बचाने के लिए टीकाकरण कराएं। विभाग ने यह भी कहा है कि पशुपालक किसानों को चाहिए कि स्थानीय मौसम पूर्वानुमान की जानकारी रखें और शीतलहर को देखते हुए पशुओं का उचित संसाधनों से बचाव करें। शीतदंश से बचाव के लिए पर्याप्त रोशनी एवं गर्मी प्रदान करने वाले उपकरणों की व्यवस्था करें।

इस सलाह में कहा गया है कि मुर्गियों / पक्षियों को रखने के स्थान पर गर्मी की व्यवस्था अनिवार्य रूप से करनी चाहिए। वाह्य परजीवियों से पशुओं को बचाने के लिए नारगुण्डी तथा लेमन ग्रास की पत्तियों को पशुशाला में टांगना चाहिए। नीम तेल से युक्त निस्क्रामक रसायनों का उपयोग किया जाना चाहिए। शीत ऋतु में पशुओं को खुले में नहीं छोड़ना चाहिए। पशुओं एवं मुर्गियों / पक्षियों को नमीयुक्त एवं धुंआ वाले स्थान पर रखने से निमोनिया का खतरा बढ़ता है। बीमार पशुओं की चिकित्सा फर्जी डॉक्टरों से नहीं करवानी चाहिए। विभाग ने आगे कहा है कि पशुओं को संतुलित एवं नमक / इलेक्ट्रोलाइट से युक्त पूरक आहार देना चाहिए। खल्ली एवं गुड़ की अतिरिक्त मात्रा देनी चाहिए, ताकि शरीर गर्म रहे। पशुओं को स्वच्छ नाद में हल्का गर्म पानी दिन में तीन-चार बार देना चाहिए। पशुओं / पक्षियों के बीमार होने पर शीघ्र स्थानीय पशु चिकित्सालय से सम्पर्क करना चाहिए। बीमार, कमजोर एवं गर्भवती पशुओं का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। आग के स्त्रोत पशुशाला से आवश्यक दूरी पर रखना चाहिए तथा अग्नि आपदा से बचाव के सभी नियमों का पालन किया जाना चाहिए।

खास बातें
- इस मौसम में मवेशियों को धुएं और नमी से बचाएं सर्दियों से पहले खुरपका मुंहपका, पीपीआर, इन्टेरोट्रॉकसीमिया रोग के विरूद्ध जरुर कराएं
- टीकाकरण नारगुण्डी तथा लेमन ग्रास की पत्तियों को पशुशाला में टांगने से परजीवियों से होता है बचाव
- पशुओं को संतुलित एवं नमक, इलेक्ट्रोलाइट से युक्त पूरक आहार देना चाहिए
- खल्ली एवं गुड़ की अतिरिक्त मात्रा देनी चाहिए, ताकि शरीर गर्म रहे।
- पक्षियों को नमीयुक्त एवं धुंआ वाले स्थान पर रखने से निमोनिया का खतरा बढ़ता है।
- मवेशियों को भी गरम कपड़े की जरूरत होती है, शाम में ही उन्हें पुराने कपड़ों से ढँकें। मवेशियों को रखने वाले स्थानों को भी पुराने कपड़ों से दीवार बना दें।





