राजद के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते ही तेजस्वी यादव ने लिया न्याय, संघर्ष और सत्य का संकल्प

Rajesh Thakur । Patna

राष्ट्रीय जनता दल के इतिहास में वह क्षण आखिर आ ही गया जिसका लोगों को इंतजार था। पटना के होटल मौर्या में राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई। इसी बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद ने बड़ा निर्णय लिया और उसका ऐलान किया। उन्होंने तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया। हालांकि, राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाये जाने की चर्चा प्रदेश से लेकर देशभर की मीडिया में चल रही थी। देखा जाए तो आज बने या कल, तेजस्वी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना तय है। वहीं कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट लिखा है। उन्होंने लिखा है कि यह क्षण केवल संगठनात्मक बदलाव का नहीं, बल्कि उस विचारधारा की निरंतरता का है, जिसने सामाजिक न्याय को सत्ता से अधिक संघर्ष का विषय माना। राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद के सानिध्य और मार्गदर्शन में एक जिम्मेदारी मिली है। यह भावुकता का नहीं, बल्कि संकल्प का क्षण है; ऋण चुकाने का अवसर है। आप खुद अक्षरशः पढ़िए उन्होंने कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर अपने समर्थकों के नाम पर क्या लिखा है-

प्रिय साथियों,
आदरणीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री लालू प्रसाद जी के सानिध्य, मार्गदर्शन और निर्देशानुसार आज राष्ट्रीय जनता दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सभी सम्मानित सदस्यों ने मुझे राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में चुना है तो इस अवसर पर मैं भावुक हूं, अभिभूत हूं और आप सभी का और जनता मालिक का ऋणी हूं। इस अवसर पर राष्ट्रीय जनता दल की स्थापना करने वाले हर एक संस्थापक सदस्य को बलिहारी हूं तथा उनके त्याग, स्वाभिमान, निडर निर्भीक इरादों और कभी झुकने ना वाले साहस को याद करता हूं। मैं विश्वास दिलाता हूं कि आदरणीय लालू जी ने गरीब, दलित, शोषित, पीड़ित, पिछड़े और वंचित समाज के जिन लोगों को बराबरी, न्याय और अधिकार दिलाने का बीड़ा उठाते हुए राष्ट्रीय जनता दल की स्थापना की थी, उन सभी लोगो को हर दुख से निजात दिलाना मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
आदरणीय लोहिया जी की नीतियों का स्मरण, जननायक कर्पूरी जी के विचारों का अनुसरण व लोकनायक जयप्रकाश जी के सिद्धांतों का अनुकरण हमेशा मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता रही है और रहेगी। संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी के दिखाए रास्ते पर चलते हुए मैं राष्ट्रीय जनता दल के न्याय की अलख जगाने के मंच बनाऊंगा और क्रांतिदूत ज्योतिबा फुले जी से शिक्षा लेते हुए बिहार में गैर बराबरी, अशिक्षा, बेरोजगारी और गरीबी के खिलाफ मरते दम तक लड़ाई लड़ता रहूंगा। गांधी जी की अहिंसा, समाजवादियों की नीति, सुभाष चंद्र बोस जी का बल, चंद्रशेखर जी का प्रण, भगत सिंह जी का जोश-जज्बा और प्रतिज्ञा, अशफाक उल्ला खान का देशप्रेम और सरदार वल्लभ भाई पटेल जी से अडिग इरादे रखते हुए मैं बिहार को उन्नति, प्रगति, समरसता, भाईचारा, एकता, अखंडता और मानवीयता के रास्ते पर आगे बढ़ाने का काम करूंगा।
ये समय ऐसा है जब बिहार ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया में भी तानाशाही, हिंसा, साम्राज्यवाद और सामंतवाद चरम पर है। ये अग्निपरीक्षा है हम जैसे समानता और मानवता पर विश्वास रखने वाले लोगो की। लेकिन जैसा कि सर्वविदित है, समय चाहे क्षणिक रूप में जिसके भी पक्ष में जाये अंत में जीत सत्य की ही होती है। इसी मंत्र को अंगीकार करते हुए हम सभी राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकर्ता देश के जनमानस को न्याय दिलाने के लिए एक साथ मिलकर, एकता की मिसाल बनकर अन्याय, हिंसा, उन्माद, शोषण, अत्याचार, तानाशाही, भेदभाव, ऊंच-नीच और गैरबराबरी जैसी हर कुरीति के खिलाफ एक होकर लड़ते रहेंगे और झूठ, छल, प्रपंच को बेनकाब करते रहेंगे।
ये देश गांधी का देश है। ये बिहार जेपी-कर्पूरी-जगदेव-लालू के आंदोलन की धरती रही है, हम सांप्रदायिक ताकतों के विरुद्ध मिलकर लड़ेंगे, मिलकर भिड़ेंगे, मिलकर जीतेंगे। बिहार, देश और दुनिया को इन अवसरवादियों के चुंगल से मुक्त करा कर ही दम लेंगे। सत्य जितना परेशान होना था हो चुका है, अब सत्य की विजय का दौर शुरू होगा।
धन्यवाद!
जय हिन्द, जय बिहार
आपका तेजस्वी।

बहरहाल, तेजस्वी यादव का यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है। उन्होंने अपने पोस्ट से यह जताया है कि राष्ट्रीय जनता दल की यह लड़ाई सत्ता की नहीं, समाज को न्याय दिलाने की है। यह संघर्ष किसी एक व्यक्ति या दल का नहीं, बल्कि उस विचार का है, जो अन्याय के हर रूप के सामने खड़ा होता है। उन्होंने यह भी अपने लोगों में मैसेज दिया है कि बिहार की धरती ने हमेशा तानाशाही और अन्याय के विरुद्ध रास्ता दिखाया है और आगे भी दिखाती रहेगी। उन्होंने आह्वान किया है कि सत्य को दबाया जा सकता है, पर हराया नहीं जा सकता। ऐसे में अब समय आ गया है कि सामाजिक न्याय, समरसता और मानवता के मूल्य फिर से केंद्र में लौटें। संघर्ष जारी रहेगा, संकल्प अडिग रहेगा और जीत अंततः सत्य की ही होगी।