Mukhiyajee Reporter । Patna
नवादा में घटित मॉब लिंचिंग की गंभीर घटना को लेकर पुलिस मुख्यालय ने सख्त और सक्रिय रुख अपनाया है। पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने मामले की उच्चस्तरीय जांच का निर्देश दिया है तथा गया प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक क्षत्रनील सिंह को पूरी घटना की स्थलीय जांच, वैज्ञानिक अनुसंधान तथा नवादा पुलिस की कार्रवाई की समग्र समीक्षा करने को कहा है। यह निर्णय उस प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद लिया गया, जिसमें AIMIM के विधायक अख़्तरूल ईमान एवं जनसुराज पार्टी के प्रवक्ता सैयद मसीहउद्दीन ने डीजीपी से भेंट कर मामले की जांच और पर्यवेक्षण में कथित शिथिलता तथा अभियुक्तों को लाभ पहुंचाने संबंधी आरोपों को विस्तार से रखा। पुलिस महानिदेशक ने सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुना और निष्पक्ष व तथ्याधारित जांच का भरोसा दिया।

गौरतलब है कि नालंदा जिला के लहेरी थाना अंतर्गत गगन दीवान मोहल्ला निवासी स्व. मो. आलम के पुत्र मो. अतहर हुसैन की 5 दिसंबर 2025 की रात नवादा जिले के रोह थाना क्षेत्र के भट्टा मोड़ पर भीड़ द्वारा कथित रूप से मारपीट किए जाने के बाद गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वे साइकिल से गांव-गांव कपड़ा फेरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। इलाज के दौरान 12 दिसंबर 2025 को उनकी मृत्यु हो गयी। इस मामले में रोह थाना कांड संख्या 413/2025 भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत दर्ज किया गया है। नवादा पुलिस अधीक्षक ने घटना को मॉब लिंचिंग से संबंधित मानते हुए इसकी पुष्टि की है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि घटना के संदर्भ में चोरी की प्रतिक्रिया के रूप में एक अलग कांड (रोह थाना कांड संख्या – 408/2025) दर्ज कर उसे सत्य घोषित किया गया, जिससे मूल कांड के अभियुक्तों को लाभ मिलने की आशंका व्यक्त की गयी है। स्थानीय चौकीदार के बयान का हवाला देते हुए यह भी कहा गया है कि घटनास्थल पर चोरी का कोई सामान नहीं मिला था और मृतक के पास से भी कोई आपत्तिजनक वस्तु बरामद नहीं हुई थी।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के दो माह बाद तक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट प्राप्त करने, डाइंग डिक्लेरेशन की वीडियो रिकॉर्डिंग को एफएसएल भेजने तथा वायरल वीडियो की वैज्ञानिक जांच कराने जैसी आवश्यक प्रक्रियाओं में अपेक्षित गति नहीं दिखी। गिरफ्तार अभियुक्तों के विरुद्ध अब तक आरोप-पत्र दाखिल नहीं होने और फरार आरोपितों पर कुर्की-जब्ती की कार्रवाई नहीं किए जाने पर भी चिंता व्यक्त की गयी। पुलिस मुख्यालय द्वारा आईजी स्तर पर जांच का आदेश इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उच्चस्तरीय समीक्षा से न केवल तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल संभव होगी, बल्कि यदि किसी स्तर पर त्रुटि या शिथिलता पायी जाती है तो उसे दुरुस्त करने की भी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।


बहरहाल, प्रवक्ता सैयद मसीहउद्दीन ने मुखियाजी ईपेपर और मुखियाजी डॉट कॉम को संयुक्त रूप से बताया कि नवादा मॉब लिंचिंग कांड ने कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द के प्रश्न को फिर से केंद्र में ला दिया है। ऐसे मामलों में त्वरित, निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच ही न्याय व्यवस्था में आमजन के विश्वास को मजबूत कर सकती है। पुलिस मुख्यालय की सक्रियता से पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद और प्रबल हुई है। इस तरह की घटना से समाज को बचना चाहिए। समाज में सौहार्द का वातावरण बहुत जरूरी है। प्रेम-मोहब्बत से ही इंसान आगे बढ़ सकता है।





