तेलडीहा मंदिर के निकट तारापुर में 29.88 करोड़ की लागत से स्थापित होगी शिव प्रतिमा, सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान

PATNA (RAJESH THAKUR) : बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि मुंगेर जिले के तारापुर प्रखंड स्थित प्रसिद्ध तेलडीहा मंदिर के नजदीक भगवान शिव की विशाल प्रतिमा और आधुनिक पार्क निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इस पर 29 करोड़ 88 लाख 45 हजार रुपये खर्च होंगे। दरअसल, कांवरिया परिपथ के अन्तर्गत मुंगेर तारापुर का उक्त स्थान एक महत्वपूर्ण पर्यटक गंतव्य है। यहां लाखों की संख्या में प्रतिवर्ष पर्यटकों का आगमन होता है। ऐसे में वहां शिव प्रतिमा स्थापित होने और पार्क बनने से पर्यटकों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी।

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना के अन्तर्गत तेलडीहा मंदिर के निकट भगवान शिव की प्रतिमा का अधिष्ठापन, चहारदिवारी का निर्माण, पार्किंग, ब्रिज एवं अन्य कार्य कराए जाएंगे। योजना का कार्यान्वयन बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा किया जायेगा। तेलडीहा मंदिर के समीप सांस्कृतिक पर्यटन के विकास हेतु रकवा- 15.44 एकड़ भूमि अधिग्रहण के निमित राशि 528.17 लाख रुपये की योजना स्वीकृत की गयी है। भू-अर्जन की कार्रवाई जिला पदाधिकारी मुंगेर द्वारा की जा रही है। योजना 18 माह में पूर्ण होने के लिए समय निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार धार्मिक स्थलों के विकास और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी मे तेलडीहा मंदिर के नजदीक इस निर्माण को स्वीकृति प्रदान की गयी है। यह परियोजना धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

बता दें कि वैसे तो तेलडीहा मंदिर बांका जिला के शंभूगंज जिला में पड़ता है। लेकिन यहां तारापुर से जाना बहुत ही आसान है। इस मंदिर में सालोंभर भक्तों और श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। खासकर हर मंगलवार को काफी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। यहां दुर्गापूजा में तो जबरदस्त भीड़ रहती है और दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। मान्यता है कि लोग यहां से निराश नहीं लौटते हैं। यहां के दर्शन मात्र से सारी मन्नतें पूरी होती हैं। कहा जता है कि बंगाल राज्य के शांतिपुरा जिले के दालपोसा गांव के हरिबल्लभ दास दो भाई थे। दोनों भाई मां दुर्गा के उपासक थे। किसी विवाद के कारण हरिबल्लभ दास अपने घर से भाग कर तेलडीहा स्थित श्मशान पहुंच गए, जिन्होंने वर्ष 1603 में तांत्रिक विधि से 105 नरमुंड पर तेलडीहा स्थित बदुआ नदी के किनारे श्मशान घाट में मां भगवती दुर्गा के मंदिर की स्थापना की।

इसके बाद यहां तांत्रिक पूजा शुरू हुई, जो आजतक चल रही है। वर्तमान में उन्हीं के वंशज इस मंदिर के मेढ़पति हैं। खास बात कि समय के अनुसार इस मंदिर के स्वरूप में भी परिवर्तन किया गया। पूर्व में पुआल के मंदिर से खपड़ैल व फिर खपड़ैल से पक्का बना दिया गया, लेकिन मंदिर के अंदर की जमीन व माता का पिंड स्थल आज भी कच्ची मिट्टी का ही है। दूसरी ओर, कांवरिया पथ पर तारापुर में ही रणगांव है और उल्टा महादेव मंदिर है। ऐसे में इन सबों के निकट ही विशाल शिव प्रतिमा और पार्क बन जाने से तारापुर में एक धार्मिक सर्किट बन जाएगा, जिससे पर्यटकों की भी भीड़ बढ़ेगी, साथ ही पर्यटन के क्षेत्र में भी संभावनाएं बढ़ेंगी।