पटना की सड़कों पर सपरिवार निकले भगवान श्री जगन्नाथ, मुख्यमंत्री ने स्वयं खींचा रथ और लगाया झाड़ू, उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी भी हुए शामिल

Mukhiyajee Reporter | Patna

भगवान श्री जगन्नाथ गुरुवार को बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ जब राजधानी पटना की सड़कों पर निकले, तो पूरा शहर श्रद्धा और उल्लास में डूब गया। इस्कॉन मंदिर, बुद्ध मार्ग एवं गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी से निकली भव्य रथ यात्रा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूजा-अर्चना की, रथ को खींचा और सेवा परंपरा का निर्वहन करते हुए झाड़ू भी लगाया। उनके साथ उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी भी शामिल हुए। दरअसल, विश्वविख्यात श्री जगन्नाथ रथ यात्रा की पावन परंपरा आज पटना में भी देखने को मिली। श्री श्री राधा बांके बिहारी इस्कॉन मंदिर, बुद्ध मार्ग एवं गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी से भगवान श्री जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा निकाली गयी। पूरे परिवार के साथ भगवान जगन्नाथ जब पटना की सड़कों पर निकले तो पूरा मार्ग जय जगन्नाथ के जयघोष, भजन-कीर्तन और पुष्पवर्षा से भक्तिमय हो उठा।

भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा में शामिल हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, रथ खींचे और झाड़ू भी लगाए…।

रथ यात्रा के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद लिया। उन्होंने परंपरा के अनुसार श्रद्धालुओं के साथ रथ की रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ किया। इसके बाद उन्होंने झाड़ू की परंपरा का प्रतीकात्मक निर्वहन करते हुए मार्ग की सफाई भी की, जिसे सेवा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। रथ यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी से प्रारंभ होने वाली विश्वविख्यात रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा, समरसता और लोकमंगल का महापर्व है। भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र एवं माता सुभद्रा की यह दिव्य यात्रा समाज को प्रेम, समानता और मानवता का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य करते हैं और हमारी सनातन परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाते हैं। बहरहाल, पारंपरिक वाद्ययंत्रों, भजन-कीर्तन और जयघोष के बीच निकली यात्रा ने राजधानी को पूरी तरह भक्तिमय रंग में रंग दिया। यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।