IND vs ZIM : टी-20 इंटरनेशनल में वैभव सूर्यवंशी का धमाका, सीरीज के पहले ही मैच जड़ा ऐतिहासिक अर्धशतक; महज 19 गेंदों में

Mukhiyajee Reporter | Patna Desk

महज 15 साल 118 दिन की उम्र… और टी-20 इंटरनेशनल में ऐसा रिकॉर्ड, जिसे बनाने में दुनिया के बड़े-बड़े बल्लेबाजों को सालों लग जाते हैं। बिहार के लाल वैभव सूर्यवंशी ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए इतिहास रच दिया है। जिम्बाब्वे के खिलाफ सीरीज के पहले मैच में ही वैभव ने शानदार अर्धशतक जड़ा और टी-20 इंटरनेशनल में फिफ्टी लगाने वाले दुनिया के सबसे कम उम्र के बल्लेबाज बन गए। उन्होंने जिब्राल्टर के लुई ब्रूस का रिकॉर्ड तोड़कर भारतीय क्रिकेट के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया। इसके साथ ही उन्होंने आलोचकों का मुंह भी बंद करा दिया।

दरअसल, भारत और जिम्बाब्वे के बीच आज से टी-20 का सीरीज शुरू हुआ है। गुरुवार को खेले गये पहले मैच में ही वैभव ने तूफानी बल्लेबाजी करते हुए फिफ्टी बनायी और उन्होंने भारत को 8 विकेट से शानदार जीत दिलाने में अहम भूमिका निभायी। जिम्बाब्वे ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 7 विकेट के नुकसान पर महज 125 रन बनाए। जवाब में भारत ने 13.2 ओवर में 3 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। भारत की पारी में सबसे बड़ा आकर्षण वैभव सूर्यवंशी रहे। उन्होंने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से न सिर्फ टीम को जीत दिलायी, बल्कि टी-20 इंटरनेशनल में अर्धशतक लगाने वाले दुनिया के सबसे कम उम्र के बल्लेबाज भी बन गए। वैभव ने 15 साल 118 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल कर जिब्राल्टर के लुई ब्रूस का रिकॉर्ड तोड़ दिया। ब्रूस ने 16 साल 56 दिन की उम्र में यह कारनामा किया था। यह श्रेयस अय्यर की कप्तानी में भारत की पहली जीत भी रही। इससे पहले भारतीय टीम को आयरलैंड के खिलाफ सीरीज में 2-0 और इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में 4-0 से हार का सामना करना पड़ा था।

बहरहाल, भारतीय क्रिकेट के इस युवा सितारे ने अपने पहले ही अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में जिस अंदाज में बल्लेबाजी की, उससे साफ है कि वैभव सूर्यवंशी का सफर अभी लंबा है और आने वाले वर्षों में वह भारतीय क्रिकेट के बड़े सितारे बन सकते हैं। वैभव सूर्यवंशी के लिए यह पारी इसलिए भी खास रही, क्योंकि पिछले कुछ समय से उनकी उम्र और लगातार मिल रहे मौकों को लेकर सवाल उठाने वाले आलोचकों की कमी नहीं थी। पहले तो उन्हें आयरलैंड के साथ खेले गये सीरीज में नहीं लिया गया। जब देशी-विदेशी क्रिकेटरों का दबाव बढ़ा तो इंग्लैंड के साथ खेले गये पांच मैचों की सीरीज में दूसरे मैच में शामिल किया गया। इतने प्रेशर की वजह से वैभव लगातार तीन मैचों 13, 14 और 15 रन बनाए। इससे आलोचकों मौका मिल गया। प्रबंधन अंतिम मैच से उन्हें बाहर निकाल दिया। जबकि हकीकत यह है कि सचिन तेंदुलकर भी अपने शुरुआती के तीन मैचों में 0, 36 और 0 रन बनाए थे। लेकिन वैभव ने बल्ले से ऐसा जवाब दिया कि तमाम आलोचनाएं खुद-ब-खुद खामोश हो गईं। महज 15 साल की उम्र में दुनिया के सबसे कम उम्र के टी-20 इंटरनेशनल अर्धशतकवीर बनकर वैभव ने साफ कर दिया कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। अब आलोचक सवाल नहीं, वैभव की अगली पारी का इंतजार करेंगे।