राष्ट्रपति के प्रति ममता सरकार के बर्ताव को बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने बताया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण

Rajesh Thakur | Patna

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शनिवार को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में आयोजित नौवें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में शामिल होने के लिए गयी थीं। वहां ममता बनर्जी की सरकार काफी बेरुखी से पेश आयी। इसे लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ममता सरकार के बर्ताव पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। यह मामला अब सियासी तूल पकड़ लिया है। इसे लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सियासी हमला करते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना को काफी शर्मनाक बताया है, वहीं बिहार के उपमुख्यमंत्री सह गृहमंत्री सम्राट चौधरी ने भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और आदिवासी समाज की भावनाओं की अनदेखी को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को ही देर रात जारी अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि सिलिगुड़ी में अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के स्थल को छोटा कर दिया गया और न मुख्यमंत्री, न कोई मंत्री उन्हें रिसीव करने पहुंचे। राष्ट्रपति ने खुद दुख जताया कि क्या ममता दीदी मुझसे नाराज हैं? श्री चौधरी ने कहा कि यह आदिवासी समुदाय और राष्ट्र के सर्वोच्च पद का अपमान है। पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने मर्यादा की सभी सीमाएं लांघ दी हैं। राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है, इसकी गरिमा का सम्मान हर हाल में होना ही चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी ने निकृष्ट राजनीति पेश कर लोकतांत्रिक व्यवस्था को तार-तार कर दी है।

बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शनिवार को बंगाल के सिलीगुड़ी में नौवें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में ममता सरकार के बर्ताव पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में आदिवासियों को जाने से रोका गया। सरकार का कोई प्रतिनिधि भी उनका स्वागत करने नहीं आया। इतना ही नहीं, उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को छोटी बहन कहते हुए कहा कि लगता है वह मुझसे काफी नाराज हैं। राष्ट्रपति ने आदिवासी समाज के पिछड़ेपन पर गहरी चिंता व्यक्त की है। दूसरी ओर ममता बनर्जी सरकार के इस रवैये पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शर्मनाक बताया है। उन्होंने कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। हर कोई जो डेमोक्रेसी और आदिवासी समुदायों के एम्पावरमेंट में विश्वास करता है, निराश है। राष्ट्रपति जी, जो खुद एक आदिवासी समुदाय से हैं, ने जो दर्द और पीड़ा जाहिर की है, उससे भारत के लोगों के मन में बहुत दुख है।