Bihar : साइक्लोन की बारिश बनी हवेली खड़गपुर में किसानों के लिए वरदान, धान के खेतों में लौटी हरियाली की उम्मीद; यदि अतिवृष्टि हुई तो?

Rajesh Thakur | Patna / Munger


बिहार के ज्यादातर जिले पिछले तीन दिनों से साइक्लोन की वजह से बारिश की चपेट में हैं। लेकिन मुंगेर के हवेली खड़गपुर क्षेत्र में यही बारिश किसानों के चेहरे पर मुस्कान लेकर आयी है। खेतों में खड़ी धान की फसलों के लिए यह पानी संजीवनी बन गया है। कहते हैं कि प्रकृति अपना संतुलन खुद बनाना जानती है, और यहां के किसान इस बात को अपनी आंखों से देख रहे हैं। दरअसल, इस बार मानसून किसानों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। बारिश हुई जरूर, लेकिन औसत से कम। नतीजा यह हुआ कि पानी के अभाव में धान के पौधे पीले पड़ने लगे और उनमें कीड़े लगने शुरू हो गए। सबसे ज्यादा चिंता उन इलाकों के किसानों को थी, जहां न नहर की सुविधा है और न पटवन का कोई खास इंतजाम। जहां निजी स्तर पर पटवन की व्यवस्था है, वहां भी गरीब किसान महंगे खर्च की वजह से इसका लाभ नहीं उठा पाते। मानसून की विदाई के बाद उनकी नजरें आसमान पर टिकी थीं। और फिर आसमान ने सुन ली।

साइक्लोन के असर से हुई बारिश ने खेतों को पानी से भर दिया। हालत यह है कि एक खेत का पानी अड्डा (मेड़) से ओवरफ्लो होकर दूसरे खेतों तक पहुंच रहा है। यानी बारिश का फायदा सिर्फ साधन-संपन्न किसानों को नहीं, बल्कि हर तरह के किसान को मिल रहा है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि कई वर्षों बाद ऐसी बारिश हुई है, जिसने सबके खेतों को एक समान तर कर दिया। किसानों को उम्मीद है कि पानी की इस प्रचुरता से धान की फसल में हरियाली लौटेगी और पौधों का पीलापन दूर होगा। हालांकि, जहां यह बारिश सूखते धान के लिए अमृत है, वहीं ज्यादा पानी ठहर जाने पर फसल को नुकसान भी हो सकता है। ऐसे में विभाग ने खड़ी फसलों में फिलहाल सिंचाई टालने की सलाह दी है, ताकि जलजमाव से फसल खराब न हो। इसलिए किसान भाई खेत में पानी की निकासी का इंतजाम दुरुस्त रखें। वज्रपात के समय घर के अंदर शरण लें और बिजली के खंभों व पेड़ों से दूर रहें। अब सवाल यह भी उठता है कि अगर साइक्लोन से बारिश नहीं आती, तो क्या होता?

इस पर कुछ ग्रामीणों का जवाब भी दिलचस्प है। उनका कहना है कि प्रकृति अपनी समस्याओं से निपटना खुद जानती है, वह खुद को कंट्रोल करना जानती है। कहीं वह तबाही बनकर बरसती है, तो कहीं वही पानी जीवनदायिनी बन जाता है। हवेली खड़गपुर के खेत फिलहाल इसी कहावत की गवाही दे रहे हैं। लेकिन, किसान अंदर ही अंदर इस बात से डर रहे हैं कि साइक्लोन कुछ ज्यादा बरस गया तो क्या होगा, जैसा कि 28-29 सितंबर तक मौसम के बिगड़े रहने की उम्मीद है। बहरहाल, हम यहां यह भी जानते हैं कि आखिर क्या होता है साइक्लोन…! साइक्लोन यानी चक्रवात समुद्र के गर्म पानी पर बनने वाला कम दबाव का ताकतवर सिस्टम है। समुद्र की सतह से उठती गर्म और नम हवा ऊपर जाकर बादल बनाती है, और खाली हुई जगह भरने के लिए आसपास की हवा तेजी से घूमती हुई भीतर आती है। इसी घूमती हवा से तेज आंधी और मूसलाधार बारिश पैदा होती है। इसका असर तट से सैकड़ों किलोमीटर दूर बिहार जैसे राज्यों तक भी पहुंच जाता है। वर्तमान में अर्णब साइक्लोन आया हुआ है, जिसकी वजह से बिहार के तमाम जिलों में बारिश हो रही है।