Mukhiyajee Reporter | Patna
जब बाढ़ का पानी घरों की चौखट लांघ जाता है, खेतों में खड़ी फसलें डूब जाती हैं और हजारों परिवार राहत शिविरों में जिंदगी को नए सिरे से संभालने की कोशिश कर रहे होते हैं, तब पीड़ितों को केवल सरकारी मदद ही नहीं, बल्कि किसी अपने के साथ खड़े होने का भरोसा भी चाहिए होता है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वैशाली और सारण के बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे के दौरान कुछ ऐसा ही भरोसा लोगों को दिया। उन्होंने हाजीपुर और सोनपुर के राहत शिविरों का निरीक्षण किया और वहां रह रहे बाढ़ पीड़ित परिवारों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने राहत शिविरों में उपलब्ध भोजन, पेयजल और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं का जायजा लिया। लेकिन यह दौरा केवल अधिकारियों से रिपोर्ट लेने तक सीमित नहीं रहा।
राहत शिविर में मुख्यमंत्री ने खुद लोगों को भोजन परोसा और फिर उन्हीं बाढ़ पीड़ितों के साथ बैठकर भोजन भी किया। सत्ता के शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति का आपदा की घड़ी में पीड़ितों के बीच इस तरह सहज होकर बैठना वहां मौजूद लोगों के लिए केवल एक दृश्य नहीं, बल्कि यह संदेश था कि संकट की इस घड़ी में सरकार उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि हर समस्या में हरेक कदम पर जनता के साथ हूँ। दरअसल, यह एक वाक्य बाढ़ से जूझ रहे उन हजारों लोगों के लिए भरोसे की तरह था, जिनकी जिंदगी इन दिनों पानी और परेशानियों के बीच गुजर रही है। दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित लोगों को सहायता राशि भी उपलब्ध करायी। साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि बाढ़ से प्रभावित किसानों की फसलों के नुकसान का समुचित आकलन कर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाएगा। बाढ़ की मार केवल घरों तक सीमित नहीं होती, बल्कि किसानों की महीनों की मेहनत भी पानी में बह जाती है। ऐसे में फसल क्षति के मुआवजे का भरोसा किसानों के लिए नयी उम्मीद लेकर आया है।


मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट कहा कि आमजन की सुरक्षा और राहत कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी। प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने और जरूरतमंद लोगों तक हरसंभव सहायता पहुंचाने का निर्देश दिया गया है। बाढ़ की त्रासदी के बीच राहत शिविर में भोजन की थाली परोसते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की यह तस्वीर शायद सरकारी दौरे की एक सामान्य तस्वीर नहीं है। यह उस रिश्ते की तस्वीर है, जहां संकट में जनता और सरकार के बीच की दूरी कम होती दिखाई देती है। क्योंकि आपदा की घड़ी में सबसे बड़ी राहत केवल राशन, दवा या मुआवजा नहीं होती, सबसे बड़ी राहत होती है यह भरोसा कि मुश्किल वक्त में कोई आपके साथ खड़ा है। बता दें कि मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी समेत अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।





