Mukhiyajee Reporter | Rajesh Thakur (Patna)
बिहार मुखिया संघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय और पंच-सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला ने आज रविवार को एक बार फिर संयुक्त रूप से कहा है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार में पंचायतों का परिसीमन लागू कर ऐतिहासिक कार्य किया है और पंचायत चुनाव अब नए परिसीमन के बाद ही लागू होगा। 2011 की जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होगा, फिर चुनाव कराए जाएंगे। परिसीमन से पंचायतों की संख्या भी 8 हजार से बढ़कर 12 हजार से अधिक हो जाएगी। दरअसल, बिहार में पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद क्षेत्रों के परिसीमन को लेकर 15 जुलाई को राज्य सरकार द्वारा लिये गये कैबिनेट निर्णय के बाद पंचायत प्रतिनिधियों के बीच खुशी का माहौल है। इस फैसले को केवल सरकार का प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि पंचायत प्रतिनिधियों के लंबे संघर्ष की जीत माना जा रहा है। इस संघर्ष के केंद्र में दो नाम सबसे अधिक चर्चा में हैं; पहला, बिहार मुखिया महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय और दूसरा, पंच-सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला।

यह भी किसी से छिपा नहीं है कि कुछ वर्ष पहले तक पंचायत प्रतिनिधियों के विभिन्न संगठन अपनी-अपनी मांगों को अलग-अलग मंचों से उठाते थे। आवाजें थीं, लेकिन उनमें एकजुटता का अभाव था। ऐसे समय में मिथिलेश कुमार राय ने पहल की और अमोद कुमार निराला के साथ मिलकर सभी प्रमुख पंचायत संगठनों को एक मंच पर लाने की मुहिम शुरू की। धीरे-धीरे मुखिया संघ, पंच-सरपंच संघ, जिला परिषद संघ, प्रमुख संघ, वार्ड सदस्य संघ और अन्य संगठनों के बीच समन्वय मजबूत हुआ तथा यही एकजुटता आगे चलकर आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत बनी। पिछले वर्ष पटना में पंचायत प्रतिनिधियों का बड़ा संयुक्त सम्मेलन आयोजित हुआ। इसके बाद आंदोलन लगातार तेज होता गया। बैठकें हुईं, धरना-प्रदर्शन हुए, ज्ञापन सौंपे गए और सरकार तक पंचायत प्रतिनिधियों की आवाज लगातार पहुंचाई गयी। मामला केवल आंदोलन तक सीमित नहीं रहा। पटना हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया गया और अधिकारियों के साथ कई दौर की वार्ता कर संवैधानिक आधार पर परिसीमन और ओबीसी आरक्षण की मांग रखी गयी।
जून में पटना में आयोजित त्रिस्तरीय एवं ग्राम कचहरी प्रतिनिधि महासंघ की संयुक्त महाबैठक इस आंदोलन का निर्णायक पड़ाव साबित हुई। उस मंच से मिथिलेश कुमार राय ने स्पष्ट कहा कि परिसीमन और ओबीसी आरक्षण व्यवस्था के बिना पंचायत चुनाव कराना संविधान की भावना के अनुरूप नहीं होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से आग्रह किया कि जैसे बिहार ने महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देकर देश को नयी दिशा दी, वैसे ही परिसीमन और ओबीसी आरक्षण लागू कर पंचायत व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाए। आंदोलन के समानांतर दोनों नेताओं ने संवाद का रास्ता भी नहीं छोड़ा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित सरकार के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों से लगातार मुलाकात कर पंचायत प्रतिनिधियों की चिंताओं और मांगों को विस्तार से रखा गया। आंदोलन और संवाद, दोनों मोर्चों पर समानांतर प्रयास जारी रहे। इन प्रयासों का परिणाम 15 जुलाई की कैबिनेट बैठक में सामने आया, जब सरकार ने पंचायत क्षेत्रों के परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया। फैसले के बाद पंचायत प्रतिनिधियों के विभिन्न संगठनों ने इसे अपनी बड़ी उपलब्धि बताया और मिथिलेश कुमार राय तथा अमोद कुमार निराला को बधाई दी।
हालांकि पंचायत संगठनों का कहना है कि उनकी लड़ाई अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। परिसीमन की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी हो, ओबीसी आरक्षण सहित अन्य लंबित मुद्दों पर भी निर्णय हो और पंचायत चुनाव पूरी तरह संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप कराए जाएं; अब आंदोलन का अगला लक्ष्य यही है। लेकिन इतना तय है कि बिहार की पंचायत राजनीति में परिसीमन की इस लड़ाई ने दो नेताओं को एक नयी पहचान दी है। बिखरे हुए संगठनों को एक मंच पर लाने से लेकर सरकार के फैसले तक की यात्रा में मिथिलेश कुमार राय और अमोद कुमार निराला ने जिस समन्वय और निरंतरता का परिचय दिया, उसी ने इस आंदोलन को नयी दिशा और निर्णायक परिणाम तक पहुंचाया।

बहरहाल, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इस निर्णय के सम्मान में दोनों संघों के अध्यक्ष बिहार भर में धन्यवाद सह आभार यात्रा निकाल रहे हैं। इसमें पंचायतों से जुड़े तमाम संगठनों का सहयोग मिल रहा है। अब तक दर्जन भर जिलों में यह कार्यक्रम हो चुका है और बाकी जिलों में भी यह निर्धारित है। इसका समापन पटना जिला में होगा। पटना में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी शामिल होंगे। इसी बीच आज एक बार दोनों नेताओं ने सोशल मीडिया के जरिये अफवाह फैलाने वाले लोगों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि परिसीमन होगा, लेकिन इसे लेकर कुछ लोग अफवाह फैला रहे हैं कि परिसीमन नहीं होगा। उन्होंने साफ लब्जों में कहा कि पंचायतों का परिसीमन होगा कोई भ्रम में नहीं रहे। चुनाव और ओबीसी आरक्षण की स्थिति साफ होगी। परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ओबीसी आयोग डेडिकेटेड कमीशन बनेगा। यह सही है कि इस वजह से पंचायत चुनाव थोड़ा विलंब से होगा, लेकिन सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले का सीधा लाभ पंचायत की जनता को ही होगा। इसी तरह की पंचायत से पार्लियामेंट तक की खबरों को पढ़ने के लिए मुखियाजी डॉट कॉम को विजिट करते रहिए। मुखियाजी का बतकुच्चन के साथ ही गली के सितारे, जल-जीवन-हरियाली, बर-बाजार, ग्राम देवता, कैबिनेट मीटिंग आदि कॉलम में भी रोचक खबरों को पढ़िए।








