Mukhiyajee Reporter | Rajesh Thakur (Patna)
बिहार में क्या अब नए परिसीमन के आधार पर होगा पंचायत चुनाव। सम्राट कैबिनेट के नए परिसीमन संबंधी फैसले से पंचायत संगठनों में उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आज शाम
कैबिनेट मीटिंग हुई, जिसमें एक एजेंडा परिसीमन का भी था। इसके अलावा एक और बड़ा निर्णय यह हुआ कि अब पंचायतों में भी होल्डिंग टैक्स वसूले जाएंगे। पहले यह जानते हैं कि कैबिनेट में पास क्या हुआ। विभाग के अनुसार आज पंचायती राज विभाग का दो महत्वपूर्ण एजेंडा पास हुआ है। पहला, बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के अंतर्गत गठित बिहार ग्राम पंचायत (कर, दर एवं शुल्क) नियमावली, 2026 को स्वीकृत किया गया। दूसरा, बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 (यथा संशोधित) की धारा 11 की उप-धारा (1) के तहत ग्राम पंचायत क्षेत्र, धारा 12 की उप-धारा (2) के तहत ग्राम पंचायत प्रादेशिक क्षेत्र, धारा 37 के तहत पंचायत समिति प्रादेशिक क्षेत्र एवं धारा 64 के तहत जिला परिषद् प्रादेशिक क्षेत्र का वर्ष 2011 की जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर गठन/परिसीमन एवं संबंधित अधिसूचना प्रारूप (अनुलग्नक-1, 2, 3 एवं 4) को मिली स्वीकृति। दोनों ही फैसलों का मुखिया महासंघ एवं पंच-सरपंच संघ ने स्वागत किया और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रति आभार जताया।


कैबिनेट के फैसले के अनुसार, ग्राम पंचायत, पंचायत प्रादेशिक क्षेत्र, पंचायत समिति प्रादेशिक क्षेत्र तथा जिला पार्षद प्रादेशिक क्षेत्र का अब 2011 की जनसंख्या के आधार पर नया परिसीमन होगा। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि अब पंचायत चुनाव 2026 नए परिसीमन के बाद ही होगा। यह भी माना जा रहा है कि अब निर्धारित समय से चुनाव का समय दो-चार माह आगे बढ़ सकता है। चूंकि इसे लेकर पटना हाईकोर्ट में भी मामला चल रहा है। दरअसल, बिहार पूरे देश में इकलौता राज्य है, जहां अभी तक 1994 के परिसीमन के आधार पर चुनाव हो रहा था। 1991 की जनसंख्या के बाद 1994 में परिसीमन हुआ था। उसके बाद से पंचायतों का परिसीमन नहीं हुआ था। वहीं अन्य राज्यों में 2011 की जनसंख्या के आधार पर चुनाव कराए जा रहे थे। इसे लेकर मुखिया महासंघ, पंच-सरपंच संघ सहित अन्य पंचायती संगठन लगातार आंदोलन चला रहे हैं। इसका नेतृत्व मुखिया संघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय तथा पंच-सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला कर रहे हैं। वे सब पिछले दिनों मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से इस मुद्दे पर मुलाकात भी की थी।

दोनों नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा कि बिहार कैबिनेट द्वारा राज्य में 36 वर्षों बाद पंचायतों के परिसीमन का निर्णय लिया जाना स्वागतयोग्य कदम है। इससे पंचायती राज व्यवस्था होगी। यह निर्णय ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी है। उन्होंने कहा कि यह वही मांग है, जिसे पंचायत प्रतिनिधि संगठन वर्षों से लगातार उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1994 में हुए अंतिम परिसीमन के बाद राज्य की जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति तथा पंचायतों की प्रशासनिक आवश्यकताओं में व्यापक परिवर्तन हुआ है। इसके बावजूद तीन दशकों से अधिक समय तक पंचायतों का परिसीमन नहीं होने से पंचायत व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। नए परिसीमन से पंचायतों की संख्या लगभग दोगुनी हो जाएगी, जो कि 16000 से अधिक हो जाएगी। बस अब समय है न्यायपूर्ण परिसीमन का। यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत पंचायत व्यवस्था की नींव रखेगा। उन्होंने कहा कि बिहार कैबिनेट का यह निर्णय पंचायतों में समान एवं संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगा तथा आगामी पंचायत चुनाव अधिक न्यायसंगत और प्रभावी होंगे। पूर्ववर्ती सरकारों के लंबे कार्यकाल में जो निर्णय नहीं लिया जा सका, उसे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार ने पूरा करने का साहसिक कदम उठाया है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि सरकार परिसीमन की प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता एवं समयबद्ध तरीके से सम्पन्न कराकर उसके उपरांत पंचायत चुनाव कराएगी, ताकि संविधान की भावना के अनुरूप सशक्त, न्यायपूर्ण एवं प्रभावी पंचायती राज व्यवस्था स्थापित हो सके।
मुखिया महासंघ बिहार एवं पंच-सरपंच संघ बिहार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, बिहार कैबिनेट तथा राज्य सरकार को इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह फैसला बिहार के पंचायती राज इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। बहरहाल, बिहार की ग्राम पंचायतों को अब कर (टैक्स) वसूलने का अधिकार मिल गया है। ग्राम पंचायतें होल्डिंग से दखलकार पर कर के अलावा पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत पेशा, व्यापार, उद्योग पर शुल्क, पंचायत के स्तर से दी गयी सेवाओं पर शुल्क एवं पंचायत की तरफ से लगाए जाने वाले अन्य तरह के शुल्क से संबंधित अधिकार मिल गए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में इससे संबंधित नियमावली के प्रारूप को मंजूरी दे दी गई है। इसका नाम ग्राम पंचायत कर, दर एवं शुल्क नियमावली, 2026 रखा गया है। इस बाबत अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने कहा कि पंचायतें इस अधिकतम दर के अधीन रहते हुए कर या शुल्क निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इसे लगा सकेंगी, जिससे पंचायतों की स्वयं की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। यह पहला मौका है, जब बिहार में पंचायतों के लिए यह व्यवस्था की गयी है। अब तक कोई नियमावली नहीं बनायी गयी है, न ही किसी राज्यादेश के माध्यम से कर, दर एवं शुल्क लगाने का अधिकार पंचायतों को सौंपे गए हैं। इस नियमावली में इन तमाम बातों का विशेष रूप से ध्यान रखते हुए उचित प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा एक अहम निर्णय में पंचायतों का वर्ष 2011 की जनसंख्या के हिसाब से नए तरीके से परिसीमन कराया जाएगा। इससे स्थानीय स्वशासन को सुदृढ़ता, विकास की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, जनसंख्या के अनुरूप संतुल्ति प्रतिनिधित्व एवं जनसुविधाओं की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। ग्राम पंचायत क्षेत्रों का गठन या परिसीन होने से प्रशासनिक दक्षता, स्थानीय प्रतिनिधित्व एवं ग्राम पंचायत क्षेत्रों के विकास में क्षेत्रीय संतुलन बढ़ेगी।







