
Mukhiyajee Reporter | Rajesh Thakur
बांकीपुर कभी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर सिन्हा की पसंदीदा सीट रही थी। इस सीट से उनके पिता कई टर्म चुनाव जीते। जब नवीन किशोर सिन्हा का निधन हो गया तो इस सीट से उनके पुत्र नितिन नवीन जीत रहे थे। इस सीट पर वे 2006 से 2025 तक लगातार विधायक रहे। कई टर्म मंत्री बने। दिसंबर 2025 में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने, फिर राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद नितिन नवीन ने विधायिकी से इस्तीफा दे दिया। अब उसी बांकीपुर सीट पर उपचुनाव को लेकर घमासान मचा हुआ है। विपक्ष को तो छोड़ दीजिए, भाजपा के अंदर ही सियासी हलचल तेज है। 24 घंटे के अंदर भाजपा के प्रत्याशी बदले जाने से विपक्ष का मनोबल ऊंचा है। यहां इसी माह 30 जुलाई को वोटिंग और अगले माह 3 अगस्त को काउंटिंग है। काउंटिंग के बाद पता चलेगा कि प्रत्याशी बदलना भाजपा की सेहत के लिए कैसा रहा, लेकिन इस समय इसे लेकर ‘किस्मत’ की चर्चा जोरों पर है।
दरअसल, नितिन नवीन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर अपना बॉस (Boss) कहा था। अब इस Boss वाली सीट पर ‘किस्मत’ ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। भाजपा ने यहां से अभिषेक कुमार बंटी को टिकट दिया था। उसे नितिन नवीन का सबसे नजदीकी नेता बताया जा रहा था। उनके नामांकन में NDA नेताओं ने खूब ‘रिश्तेदारी’ निभायी। नामांकन कक्ष से लेकर चुनावी सभा तक NDA के बड़े-बड़े नेता मौजूद रहे। उन्होंने अपनी जबरदस्त एकता दिखायी। यहां तक कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी, जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, लोजपा आर की सांसद शांभवी चौधरी, रालोमो के संस्थापक उपेंद्र कुशवाहा के अलावा दिलीप जायसवाल, विजय सिन्हा, रविशंकर प्रसाद जैसे दिग्गज मंत्री व नेता शामिल हुए। चुनावी सभा में अभिषेक के ‘राज्याभिषेक’ के लिए खूब कसीदे पढ़े गये। उन्हें बांकीपुर का भावी विधायक बताया गया। उनके सम्मान में खूब नारे लगाए गए। लेकिन यह सब ‘किस्मत’ को शायद मंजूर नहीं थी। परोसी हुई ‘सियासी थाली’ आगे से निकल गयी।
और यह किस्मत का ही खेल रहा कि भाजपा की ओर से टिकट अब उसे मिला है, जिसने इसकी कल्पना तक नहीं की थी। सपने में भी नहीं सोचा था। इतना ही नहीं, जिस समय टिकट के लिए उन्हें पार्टी ऑफिस से फोन आया; उस समय वे पुराने प्रत्याशी को जिताने के लिए बूथ अध्यक्ष होने के नाते अपने इलाके में पर्ची बाँट रहे थे। जो भी कारण रहा हो, लेकिन जब अभिषेक ने पारिवारिक कारण से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया तो पार्टी ने आनन-फानन में टिकट नीरज सिन्हा को दे दिया। नीरज सिन्हा बिहारशरीफ के रहने वाले हैं और वर्तमान में पटना के मीठापुर इलाके में अपने बड़े भाई के साथ किराये के मकान मेंरहते हैं। टिकट मिलने के बाद नीरज ने खुद मीडिया को बताया कि पार्टी ऑफिस से फोन आया तो उन्हें कहां पता था कि जिनके लिए वे बूथ पर्ची बाँट रहे हैं, उनकी जगह अब वे खुद प्रत्याशी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि हमने सपने में भी नहीं सोचा था कि हमें टिकट मिलेगा। नीरज के बड़े भाई भी कहते हैं कि हमलोग किराये के मकान में रहते हैं। सैलरी भी महज 30 हजार के आसपास, ऐसे में चुनाव लड़ने के बारे में कहां से सोचते। पार्टी ही नहीं, मुहल्ले वाले भी कहते हैं कि ‘किस्मत’ भी कोई चीज होती है। कई दिग्गज नेता भी कहते हैं कि आपके पास लाख धन हो, लेकिन किस्मत सही नहीं हो तो आप सदन नहीं पहुंच सकते हैं।
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बहरहाल, हम यहां किसी अंधविश्वास की बात नहीं कर रहे हैं और न ही किसी की मेहनत को इग्नोर कर रहे हैं। लेकिन, बिहार की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल बांकीपुर में भाजपा ने महज 24 घंटे के भीतर जो बड़ा सियासी उलटफेर किया है, उससे लोग सोचने पर विवश हो गए हैं। वरना 9 जुलाई को अभिषेक बंटी का पूरी पार्टी में जलवा था। छोटे से लेकर बड़े नेता तक गुणगान कर रहे थे, लेकिन तारीख बदलते ही सारा खेल गड़बड़ हो गया। अभिषेक के लिए ‘संभावित राज्याभिषेक’ की परोसी हुई सियासी थाली सामने से खिसक गयी। और टिकट मिला भी तो एक साधारण कार्यकर्ता को। सूत्रों की मानें तो पिछले साल दिसंबर के दूसरे पखवारे में नितिन नवीन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने की घोषणा हुई थी, फिर उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया, उसी समय से बांकीपुर क्षेत्र से टिकट के लिए कायस्थ समाज के बड़े-बड़े लोग ‘सियासी दौड़’ में शामिल हो गए थे। लेकिन यहां तो किस्मत नीरज सिन्हा का इंतजार कर रही थी, फिर भला अभिषेक बीच में कहां से आता…!!



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