रामायण रिसर्च काउंसिल का संकल्प अब जमीन पर, सीतामढ़ी को शक्ति-क्षेत्र के रूप में विकसित करने का अभियान तेज : ट्रस्टी संजीव सिंह

Rajesh Thakur | Patna

सीतामढ़ी को आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से कार्यरत रामायण रिसर्च काउंसिल के ट्रस्टी संजीव सिंह ने कहा है कि वर्ष 2019 से शुरू हुआ ‘संकल्प-सीतामढ़ी अभियान’ अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। आने वाले समय में सीतामढ़ी केवल माता जानकी की जन्मभूमि ही नहीं, बल्कि विश्वस्तर पर ‘नारी शक्ति और सनातन संस्कृति’ के केंद्र के रूप में स्थापित होगी। उन्होंने कहा कि काउंसिल ने पिछले कई वर्षों में देश के विभिन्न राज्यों में सैकड़ों संगोष्ठियों, जन-जागरण अभियानों, साहित्य वितरण और सांस्कृतिक संवाद कार्यक्रमों के जरिए सीतामढ़ी के आध्यात्मिक महत्व को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि इन सतत प्रयासों को देखते हुए बिहार सरकार द्वारा श्रीजानकी मठ परिसर में भूमि उपलब्ध कराया जाना इस अभियान की बड़ी उपलब्धि है।

ट्रस्टी संजीव सिंह ने मुखियाजी डॉट कॉम को बताया कि वर्तमान में रामायण रिसर्च काउंसिल चार चरणों में कार्य कर रही है। पहले चरण में लगभग 834 वर्ष प्राचीन मठ के जीर्णोद्धार का कार्य तेजी से चल रहा है। दूसरे चरण में यहां प्रतिदिन होने वाली ‘धरती माता आरती’ की परंपरा शुरू की जाएगी, जो अपने प्रकार की अनूठी पहल होगी। उन्होंने कहा कि तीसरे चरण में देशभर के शक्ति-पीठों की पवित्र मिट्टी और ज्योति को एकत्र कर ‘अखंड शक्तिपीठ’ का निर्माण किया जाएगा, ताकि सनातन परंपरा की ऊर्जा एक केंद्र पर अनुभव की जा सके। वहीं चौथे चरण में सीतामढ़ी में ‘विश्व नारी शक्ति केंद्र’, शोध संस्थान, अध्ययन केंद्र, डिजिटल संग्रहालय और माता जानकी से जुड़े वैश्विक दस्तावेजों का केंद्र विकसित करने की योजना है।

उन्होंने कहा कि सीतामढ़ी केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, नारी सम्मान और आध्यात्मिक चेतना का भविष्य भी है। हमारा लक्ष्य है कि आने वाली पीढ़ियां यहां केवल दर्शन के लिए नहीं, बल्कि अध्ययन, शोध और प्रेरणा के लिए भी आएं। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से इस अभियान से जुड़ने और सीतामढ़ी को वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर स्थापित करने में सहयोग की अपील की।