Rajesh Thakur | Patna
माँ जानकी की भूमि सीतामढ़ी में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ बारिश का अद्भुत दैवीय संयोग और अब उनको लेकर जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज की भविष्यवाणी, इन दो अद्भुत संयोगों ने बिहार की सियासत में हलचल मचा दी है। इस पूरे प्रकरण से जहां सम्राट चौधरी के समर्थकों में काफी उत्साह है, वहीं विरोधी अंदर ही अंदर चिंतित दिख रहे हैं। इन सबसे इतर, बिहार के लोग भी इसे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के लिए शुभ संकेत मान रहे हैं। दरअसल, बिहार की राजनीति में लगभग दो दशक बाद सत्ता का हस्तांतरण हुआ है। नीतीश कुमार की जगह अब मुख्यमंत्री की कुर्सी पर सम्राट चौधरी बैठे हैं। खास बात यह है कि बिहार के सियासी गलियारे में कई ऐसे ‘हिडेन नेता’ थे, जो नैरेटिव सेट कर सम्राट चौधरी को घेर रहे थे और उनकी जगह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर किसी ‘अपने’ को बैठाना चाह रहे थे। लेकिन सारे नैरेटिव्स को तोड़कर सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बन गए। अब वही ‘हिडेन नेता’ अफवाह फैला रहे हैं कि वे बहुत ज्यादा दिन तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं रहेंगे। ऐसे में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर 26 अप्रैल को रामभद्राचार्य जी की भविष्यवाणी को लोग शुभ संकेत मान रहे हैं।
बिहार में नेतृत्व परिवर्तन के बाद उठ रहे सवालों के बीच जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज की आवाज ने बहस को नया आयाम दे दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर जो भरोसा जताया है, वह केवल व्यक्तिगत प्रशंसा नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है। पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने साफ कहा, ‘सम्राट चौधरी बहुत अच्छा लड़का (नेता) है। वह कल मिलने भी आया था। जैसे नीतीश कुमार जी ने काम किया, उसी ढंग से सब चलता रहेगा। यह (सम्राट चौधरी) भी बहुत अच्छा करेगा और उन्हीं के रास्ते पर चलकर अपना कार्यकाल पूरा करेगा।’ यह बयान ऐसे समय में आया है, जब सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक निरंतरता और राजनीतिक स्थिरता को लेकर विरोधी से लेकर हिडेन नेता तक सवाल उठा रहे हैं।


बता दें कि सीतामढ़ी में जानकी नवमी पर 25 अप्रैल को माँ सीता के जन्म स्थान पुनौराधाम मंदिर में सम्राट चौधरी ने पूजा-अर्चना की थी। इसके साथ ही उन्होंने करीब 837 वर्ष पुराने राघोपुर बखरी स्थित राम-जानकी मठ के जीर्णोद्धार के लिए शिलापूजन भी किया था। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने श्रीराम-जानकी मठ में आयोजित शिलापूजन समारोह में लोगों को संबोधित करते हुए हजारों वर्ष पुराने उस प्रसंग को दोहराया कि राजा जनक के समय पड़े भयंकर अकाल के बीच मां सीता का अवतरण हुआ और उनके आगमन के साथ ही वर्षा ने धरती को जीवन दिया। उन्होंने पुनौराधाम के शिलान्यास का भी जिक्र किया और कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पिछले साल जब इसका शिलान्यास किया था, तो उस दिन भी यहां बारिश हुई थी। दिलचस्प यह रहा कि जब यह प्रसंग सुनाया जा रहा था, उस समय शहर का तापमान करीब 41 डिग्री सेल्सियस था और बारिश की कोई संभावना नहीं थी। लेकिन महज 12 घंटे के भीतर तेज बारिश ने पूरे इलाके को भिगो दिया। पूजा लगभग दोपहर 2 बजे शुरू हुई थी और उसमें यजमान के रूप में रामायण रिसर्च काउंसिल के मुख्य ट्रस्टी संजीव सिंह सप्तनीक बैठे हुए थे।
इसके पहले पुनौराधाम के कार्यक्रम में पधारे जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की आत्मीय मुलाकात हुई। जगद्गुरु ने मुख्यमंत्री को अपने अंक में भर लिया और उनका स्नेह पाकर मुख्यमंत्री भावुक हो उठे। ऐसे में राघोपुर बखरी में शिलापूजन और उसके बाद हुई बारिश को स्थानीय लोग ‘मां जानकी की कृपा’ और राज्य के लिए ‘शुभ संकेत’ के रूप में देख ही रहे थे कि दूसरे दिन ही रामभद्राचार्य जी महाराज की भविष्यवाणी एक और संकेत के रूप में इस चर्चा में जुड़ गयी। लोगों के बीच अब यह चर्चा तेज हो गयी है कि इस पूरे घटनाक्रम के राजनीतिक मायने क्या हैं। रामभद्राचार्य का यह बयान कई स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है—पहला, हिंदू धर्म में संतों की वाणी और भविष्यवाणी का अपना महत्व है। ऐसे में देश के एक प्रतिष्ठित संत द्वारा खुले तौर पर समर्थन देना सम्राट चौधरी के नेतृत्व को नैतिक मजबूती देता है। दूसरा, इससे ‘नीतीश मॉडल’ की निरंतरता का भी संकेत मिलता है। जब संत यह कहते हैं कि सब कुछ नीतीश कुमार के ढंग से ही चलता रहेगा, तो यह प्रशासनिक निरंतरता का संकेत है। यानी बदलाव के बावजूद शासन की दिशा और शैली में बड़ा विचलन नहीं होगा। यह निवेश, नौकरशाही और आम जनता के लिए भरोसे का आधार बनता है। और यह सब जानते हैं कि नीतीश कुमार की ही पसंद हैं सम्राट चौधरी। तीसरा, इससे स्थिरता का भी संदेश जाता है। दरअसल, भारतीय राजनीति में ‘कार्यकाल पूरा करना’ अपने आप में एक बड़ा संकेत है। यह बयान न केवल राजनीतिक अटकलों को शांत करता है, बल्कि सहयोगी दलों और विपक्ष दोनों को यह संदेश देता है कि सत्ता समीकरण फिलहाल स्थिर हैं। ऐसे में रामभद्राचार्य जी महाराज का समर्थन आस्था रखने वाले लोगों में मुख्यमंत्री की पैठ के रूप में भी देखा जा सकता है। वहीं इससे ग्रामीण और परंपरागत मतदाता वर्ग में भी उनकी स्वीकार्यता मजबूत होने की संभावना है।
बहरहाल, जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी का यह बयान केवल एक साधु का आशीर्वाद भर नहीं माना जा सकता। इसमें राजनीतिक स्थिरता, नेतृत्व की स्वीकार्यता और शासन की निरंतरता, तीनों के संकेत छिपे हैं। बिहार की राजनीति में जहां समीकरण तेजी से बदलते रहे हैं, वहां इस तरह का स्पष्ट समर्थन एक ‘साइलेंट मैसेज’ भी देता है कि फिलहाल सत्ता का पहिया स्थिर है और सम्राट चौधरी को समय और अवसर दोनों मिलते दिख रहे हैं।









