Ajeet Kumar | Patna
माह-ए-रमजान के मुकद्दस मौके पर पटना में फुलवारी शरीफ स्थित मुनीर कॉलोनी की रहने वाली 7 साल की आयरा होदा ने अलविदा जुमे के दिन अपने जीवन का पहला रोजा रखकर सबका दिल जीत लिया। दिन भर रोजा रखना उसके लिए सब्र का इम्तिहान रहा, लेकिन परिवार के हौसले और दुआओं के बीच उसने अपना पहला रोजा मुकम्मल किया। दिन में जब भी थकान महसूस होती तो वह अपनी मां और परिवार के अन्य लोगों की गोद में जाकर थोड़ी देर सो जाती। पूरे दिन परिवार और रिश्तेदार उसके लिए दुआ करते रहे कि वह अपना पहला रोजा सफलतापूर्वक पूरा कर सके। शाम में निर्धारित समय पर आयरा ने अपने परिवार के साथ रोजा खोला। रोजा मुकम्मल होने पर परिवार, रिश्तेदारों और मोहल्ले के लोगों ने उसे दुआएं दीं और खुश होकर तोहफे भी दिए।


आयरा होदा संत माइकल स्कूल में पहली कक्षा की छात्रा है। उसके पिता अमीरुल होदा पटना जीपीओ में सीनियर सेक्शन ऑफिसर हैं, जबकि मां यासमीन बेगम गृहिणी हैं। बेटी के पहले रोजे पर माता-पिता, परिवार और मोहल्ले के लोगों ने खुशी जताते हुए उसके लिए खूब दुआएं कीं और कहा कि अल्लाह ताला उसकी इबादत कबूल करे। बता दें कि माह-ए-रमजान के आखिरी जुमे यानी अलविदा जुमे के मौके पर पूरे बिहार की मस्जिदों में रोजेदारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। अकीदतमंद सुबह से ही मस्जिदों में पहुंचने लगे और नमाज अता कर मुल्क में अमन, चैन, भाईचारे और तरक्की के लिए दुआ मांगी। नमाज के बाद रोजेदारों ने हाथ उठाकर अल्लाह की बारगाह में पूरी दुनिया में अमन-चैन और विश्व शांति के लिए दुआ मांगी। उन्होंने दुआ की कि जहां-जहां युद्ध और हिंसा हो रही है, वह समाप्त हो जाए, ताकि इंसानियत और मानवता की हिफाजत हो सके। राजधानी पटना की तरह ही भागलपुर, मधुबनी, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, दरभंगा सहित अन्य जिलों में भी रोजेदारों ने आखिरी जुमे की नमाज अदा की।


बहरहाल, अलविदा जुमे को लेकर पटना समेत राज्य की कई मस्जिदों में खास इंतजाम किए गए थे। नमाज से पहले उलेमाओं ने रमजान की फजीलत, रोजेदारों की अहमियत और इंसानियत व भाईचारे का पैगाम दिया। नमाज के दौरान रोजेदारों ने देश और दुनिया में अमन-चैन, खुशहाली और आपसी सौहार्द के लिए दुआ मांगी। नमाज के बाद लोगों में खास रूहानी माहौल देखने को मिला और अकीदतमंदों ने एक-दूसरे को दुआओं के साथ आने वाली ईद की मुबारकबाद भी दी। वहीं, अलविदा नमाज के बाद दिए गए खुतबे में उलेमाओं ने कहा कि रमजान का आखिरी जुमा यह याद दिलाता है कि रहमतों और बरकतों से भरा यह मुबारक महीना अब हमसे जुदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि इंसानियत, रहमदिली और मोहब्बत का जो पैगाम रमजान हमें देकर जा रहा है, उसे अपने दिलों में हमेशा के लिए बसाना चाहिए। अल्लाह की रहमतों के नूर को अपने दिल में इस तरह सजाओ कि उससे दूसरों के दिल भी रौशन हो सकें।


माह-ए-रमजान के आखिरी जुम्मे यानी अलविदा जुम्मा के मौके पर फुलवारी शरीफ सहित पूरे बिहार की मस्जिदों में उमड़े रोजेदार, पढ़ें अजीत कुमार की रिपोर्ट…



