रमजानुल मुबारक का चाँद दिखा, रमजान का पवित्र माह शुरू; मस्जिदों में उमड़े अकीदतमंद

Ajeet Kumar | Fulwari Sharif

इस्लामी कैलेंडर के सबसे पवित्र महीने रमजानुल मुबारक का चाँद बुधवार की शाम देश के विभिन्न हिस्सों में नजर आ गया। चाँद देखे जाने की तस्दीक के साथ ही गुरुवार से माह-ए-रमजान की शुरुआत हो गयी और गुरुवार को पहला रोजा है। बिहार के गया, नवादा, समस्तीपुर के मुसरीघरारी, दरभंगा तथा झारखंड के रांची, लोहरदगा और चतरा समेत असम व देश के अन्य हिस्सों से चाँद दिखने की सूचना मिलने के बाद बिहार, झारखंड और ओडिशा के मुसलमानों की प्रमुख संस्था इमारत-ए-शरिया तथा ऐतिहासिक सूफी संस्थान खानकाह मुजीबिया सहित विभिन्न मुस्लिम इदारों ने ऐलान किया कि रमजान मुबारक का पहला रोजा गुरुवार से शुरू होगा। खानकाह मुजीबिया, फुलवारी शरीफ के प्रशासक सैयद शाह मिन्हाजुद्दीन कादरी और इमारत-ए-शरिया के काज़ी मौलाना अंजार आलम कासमी ने चाँद नजर आने की पुष्टि की है।

उन्होंने बताया कि बुधवार को रमजान का चाँद दिखाई दे गया है, जिसके साथ ही मुकद्दस महीने का आगाज हो गया। इमारत-ए-शरिया के नाजिम मौलाना सईदुर रहमान कासमी ने भी समुदाय को रमजान की मुबारकबाद दी और अपील की कि इस पवित्र महीने में अधिक से अधिक इबादत, तिलावत-ए-कुरआन और जरूरतमंदों की मदद करें। रमजान को रहमत, मगफिरत और जहन्नम से निजात का महीना माना जाता है। इस दौरान मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखते हैं। रोजा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि सब्र, परहेजगारी और तकवा को आत्मसात करने का माध्यम है। यह महीना इंसान को बुराइयों से दूर रहकर नेकी, इंसानियत और सामाजिक सौहार्द की राह पर चलने का पैगाम देता है।

चाँद नजर आने के साथ ही मस्जिदों में रौनक बढ़ गयी है। तरावीह की नमाज के लिए अकीदतमंद बड़ी संख्या में मस्जिदों का रुख कर रहे हैं। बाजारों में भी देर रात तक चहल-पहल देखी गयी। खजूर, फल, सेवइयां और रोजमर्रा के सामान की खरीदारी को लेकर लोगों में खास उत्साह नजर आया। उलेमा के अनुसार रमजान के महीने में एक नेक अमल का सवाब सत्तर गुना तक बढ़ा दिया जाता है। जकात और फितरा अदा कर गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करना इस महीने की विशेष अहमियत है। आध्यात्मिक ऊर्जा, आत्मशुद्धि और भाईचारे के संदेश के साथ शुरू हुआ यह पवित्र माह अब इबादतों, दुआओं और बरकतों के साये में आगे बढ़ेगा।