Ramadan 2026 : अकीदत और एहतराम के साथ रखा गया रमजान का पहला रोजा, बच्चों में दिखा उत्साह

Ajeet Kumar | Patna
पवित्र माह रमजान की शुरुआत के साथ ही पटना के फुलवारी शरीफ में इबादत और रूहानियत का माहौल बन गया। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पूरे अकीदत और एहतराम के साथ पहला रोजा रखा। सुबह सहरी के बाद रोजेदारों ने दिनभर भूखे-प्यासे रहकर सब्र और परहेजगारी का पैगाम दिया। दिनभर इबादत का सिलसिला जारी रहा। मस्जिदों और घरों में कुरआन की तिलावत की गयी। रोजेदारों ने अल्लाह की बारगाह में सजदा कर अपने गुनाहों की माफी मांगी और मुल्क में अमन-चैन की दुआ की। रमजान को रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना माना जाता है, इसलिए पहले ही दिन से लोगों में खास जोश और उत्साह देखा गया। शाम होते ही जैसे ही मगरिब की अजान की आवाज गूंजी, मस्जिदों में सामूहिक इफ्तार के खूबसूरत नजारे दिखे। कई जगहों पर लोगों ने एक साथ बैठकर खजूर और पानी से रोजा खोला और अपने रब का शुक्र अदा किया। घरों में भी परिवार के साथ इफ्तार का खास इंतजाम किया गया। महिलाओं ने तरह-तरह के पकवान तैयार किए और बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ रोजा रखा।

पहले रोजे के साथ ही बाजारों में भी रौनक बढ़ गयी। शाम के समय खजूर, फल, पकौड़ी और अन्य इफ्तार सामग्री की दुकानों पर भीड़ देखी गयी। जैसे ही इफ्तार का समय होने का सायरन बजा, रोजेदारों ने दुआ के साथ अपना रोजा खोला। रमजान-उल-मुबारक का महीना इंसान को सब्र, संयम और नेक रास्ते पर चलने की सीख देता है। यह महीना बुराइयों से दूर रहने और इंसानियत को अपनाने का पैगाम देता है। बड़े-बुजुर्गों के साथ-साथ बच्चे भी इस पाक महीने में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। पहले रोजे ने ही पूरे इलाके में एक रूहानी माहौल बना दिया है, जो पूरे महीने कायम रहने की उम्मीद है। उधर, इमारत-ए-शरिया बिहार, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के अमीर-ए-शरीयत हजरत मौलाना सैयद अहमद वली फैसल रहमानी ने रमजान के मौके पर लोगों से बैतुल माल को मजबूत करने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि इमारत-ए-शरिया एक प्रतिष्ठित धार्मिक और सामाजिक संस्था है, जो समाज की एकता, धार्मिक अधिकारों की रक्षा, शिक्षा के प्रसार और जरूरतमंदों की मदद का काम कर रही है। उन्होंने बताया कि बैतुल माल इमारत -ए-शरिया की पूरी व्यवस्था का अहम हिस्सा है। इसी के माध्यम से अनाथों, विधवाओं, गरीब छात्रों, जरूरतमंद लड़कियों की शादी, प्राकृतिक आपदा और दंगा प्रभावित लोगों की सहायता की जाती है। संस्था के अंतर्गत मौलाना साज्जाद मेमोरियल अस्पताल सहित कई स्वास्थ्य केंद्र संचालित हो रहे हैं, जहां गरीब मरीजों का इलाज किया जाता है. इसके अलावा तकनीकी संस्थान, दारुल कजा, मदरसे और आधुनिक विद्यालय भी चलाए जा रहे हैं। अमीर-ए-शरीयत ने कहा कि बढ़ती गतिविधियों के कारण खर्च में काफी वृद्धि हुई है। बैतुल माल का वार्षिक बजट लगभग 13 करोड़ 95 लाख 66 हजार रुपये है। ऐसे में रमज़ान के पाक महीने में देशभर के सक्षम लोग जकात, सदका, फितरा और अन्य दान की राशि देकर संस्था को मजबूत करें।