Rajesh Thakur | Patna
होली जैसे पारिवारिक और पर्व पर अपने घर से दूर तैनात शिक्षकों की पीड़ा जब विधान परिषद के सदन में आवाज बनी, तो माहौल संवेदनशील हो उठा। गया शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान पार्षद जीवन कुमार ने बुधवार को शून्यकाल के दौरान शिक्षकों की सुरक्षा और सुविधा का मुद्दा उठाते हुए होली अवकाश के विस्तार की पुरजोर मांग की। उन्होंने कहा कि विभागीय अवकाश तालिका के अनुसार इस वर्ष होली की छुट्टी केवल 3 और 4 मार्च को निर्धारित है। ऐसे में जो शिक्षक अपने गृह जिले से सैकड़ों किलोमीटर दूर कार्यरत हैं या अन्य राज्यों के निवासी हैं, उन्हें 5 मार्च को विद्यालय पहुंचने के लिए होली के दिन ही वापस लौटना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि त्योहार के दिन परिवहन की उपलब्धता सीमित रहती है और भीड़-भाड़ के कारण यात्रा करना सुरक्षा की दृष्टि से भी जोखिमपूर्ण होता है।

दरअसल, बिहार में तमाम शिक्षकों की नियुक्ति हो या प्रतिनियुक्ति, सबों की पोस्टिंग दूसरे जिलों में है। किसी का घर नालंदा है तो उसकी पोस्टिंग पश्चिम चंपारण है। किसी का घर नवादा है तो उसकी पोस्टिंग अररिया-फारबिसगंज है। ऐसी पोस्टिंग केवल पुरुषों की ही नहीं है, बल्कि महिलाओं की भी है। पर्व-त्यौहार में महिलाओं पर घर-नौकरी की दोहरी जिम्मेदारी होती है। ऐसे में होली जैसे पर्व पर घर आने वाले शिक्षकों को उसी दिन लौटना संभव नहीं है। हां, अपनी गाड़ी रखने वाले या रिजर्व की सुविधा वाले शिक्षक ही ड्यूटी पर लौट सकते हैं। शिक्षकों की पीड़ा को महसूस करते हुए विधान पार्षद ने सदन के माध्यम से सरकार से मांग की है कि राज्य के सरकारी विद्यालयों में 2 मार्च (होलिका दहन) से 5 मार्च तक अवकाश घोषित किया जाए, ताकि शिक्षक सुरक्षित रूप से अपने परिवार के साथ पर्व मना सकें और बिना किसी दबाव के ड्यूटी पर लौट सकें।

विधान पार्षद ने कहा कि शिक्षक समाज की रीढ़ हैं और वे हर परिस्थिति में छात्रों और अभिभावकों के साथ खड़े रहते हैं। जब शिक्षक समाज का बेटा हर कठिनाई में ढाल बनकर खड़ा है, तो सरकार का भी दायित्व है कि उनके मान-सम्मान और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखे। सदन में उठी इस मांग को शिक्षक समुदाय के हितों से जोड़कर देखा जा रहा है। शिक्षा जगत के कई प्रतिनिधियों ने भी इस पहल को सराहा है और इसे शिक्षक वर्ग की व्यावहारिक समस्याओं को समझने वाला कदम बताया है। अब नजर सरकार के निर्णय पर टिकी है कि होली के पावन अवसर पर शिक्षकों को राहत मिलती है या नहीं।




