Nidhi Sekhar । Patna
बिहार सहित उत्तर भारत इन दिनों शीतलहरी की चपेट में है। पटना भी इससे अछूता नहीं है। बिहार के मैक्सिमम जिलों में कोल्ड डे जैसी स्थिति बनी हुई है। ऐसे मौसम में गठिया (आर्थराइटिस) और नसों से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित लोगों की परेशानियां बढ़ जाती हैं। तापमान गिरने के साथ ही जोड़ों में दर्द, अकड़न, झनझनाहट और सुन्नता जैसी शिकायतें आम हो जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस मौसम में आवश्यक सावधानियां न बरती जाएं, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। पटना के सत्य नारायण सिंह मेमोरियल क्लिनिक में कार्यरत हड्डी एवं नस रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकित कुमार कहते हैं कि इस मौसम में हर किसी को संभल कर रहने की जरूरत है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक को इसमें एहतियात बरतने की जरूरत है।

डॉ अंकित के अनुसार, ठंड के कारण शरीर की मांसपेशियां और जोड़ सिकुड़ जाते हैं, जिससे ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है। इसका सीधा असर गठिया और नसों की बीमारियों पर पड़ता है। खासकर बुजुर्ग, पुराने मरीज और पहले से सर्वाइकल, सायटिका या स्लिप डिस्क से पीड़ित लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। वे बताते हैं कि ठंड में जोड़ों के आसपास की सूजन बढ़ सकती है और नसों पर दबाव भी ज्यादा महसूस होता है। इसके कारण हाथ-पैरों में झनझनाहट, जलन, कमजोरी और कभी-कभी संतुलन बिगड़ने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। सुबह के समय दर्द और अकड़न सबसे ज्यादा होती है, क्योंकि रात में शरीर निष्क्रिय रहता है और तापमान कम हो जाता है। इतना ही नहीं, ठंड के मौसम में गिरने का खतरा भी बढ़ जाता है। अकड़न और मांसपेशियों की कमजोरी के कारण फिसलने या गलत ढंग से चलने पर फ्रैक्चर की आशंका बनी रहती है।

वे कहते हैं कि ऐसे मौसम में सावधानी और परहेज बहुत जरूरी है। गठिया और नस की बीमारी से पीड़ित लोगों को ठंड सीधे शरीर पर नहीं लगने देनी चाहिए। घुटने, कमर, गर्दन और पैरों को ढंककर रखना चाहिए। ठंडे फर्श पर नंगे पैर चलने और ठंडे पानी से नहाने से बचना चाहिए। वे यह भी सलाह देते हैं कि लोगों को चाहिए कि वे सुबह उठते ही भारी काम करने या अचानक झुकने से बचें। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठना या मोबाइल-लैपटॉप का अत्यधिक इस्तेमाल नसों की समस्या को बढ़ा सकता है। ऐसे मौसम में खासकर मरीजों के लिए रोज हल्की एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग बेहद जरूरी है। धूप में टहलना, गुनगुने पानी से नहाना और जरूरत पड़ने पर हल्की गर्म सिकाई करने से भी ऐसे मरीजों को राहत मिलती है। उनके लिए संतुलित आहार, कैल्शियम और विटामिन-डी की पर्याप्त मात्रा भी जरूरी है।

वे यह भी आगाह करते हैं कि हालांकि मरीजों को दर्द बढ़ने पर बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर या अन्य दवाएं नहीं लेना चाहिए। इससे नुकसान हो सकता है। यदि दर्द असहनीय हो, हाथ-पैर लगातार सुन्न रहें या चलने में दिक्कत आने लगे, तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। ठंड खुद बीमारी नहीं बढ़ाती, बल्कि लापरवाही से समस्या गंभीर होती है। समय पर सावधानी, नियमित हलचल और सही दिनचर्या अपनाकर ठंड के मौसम में भी गठिया और नस की बीमारियों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।





