Mukhiyajee Reporter | Patna
अधिकारों से समझौता नहीं होगा- प्रदर्शनकारियों के बैनर पर लिखा यह स्लोगन गुरुवार को पटना की सड़कों पर नारों में बदलकर गूंजती रही। त्रिस्तरीय पंचायत और ग्राम कचहरी प्रतिनिधियों की समस्याओं के समाधान और पंचायती राज व्यवस्था को सशक्त बनाने की मांग को लेकर बिहार मुखिया महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय और बिहार पंच-सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला की अगुआई में विभिन्न जिलों से पहुंचे प्रतिनिधियों ने दारोगा प्रसाद राय ट्रस्ट भवन से पंचायती राज मंत्री के आवास की ओर कूच किया। पुल के समीप पुलिस ने रास्ता रोक दिया, तो बढ़ती भीड़ और बैरिकेडिंग संभाले पुलिसकर्मियों के बीच काफी देर तक जद्दोजहद चलती रही।



संगठन के अनुसार, कार्यक्रम की सूचना के महज 48 घंटे के भीतर 20 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधि पटना पहुंच गए। मंत्री आवास तक न पहुंच पाने के बावजूद प्रतिनिधियों का हौसला नहीं टूटा। आखिरकार मुख्यमंत्री सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी ने वार्ता कर ज्ञापन प्राप्त किया। वार्ता में मिथिलेश कुमार राय और अमोद कुमार निराला के अलावा जयमाला कुमारी पासवान, अनुज कुमार सिंह, सुनील यादव और राजीव सिंह मंटू सहित अन्य प्रतिनिधि शामिल रहे। शाम पांच बजे तक मांगों पर डटे रहने के बाद सरकार की ओर से सकारात्मक पहल के आश्वासन पर आंदोलन फिलहाल स्थगित किया गया। ज्ञापन में मांगों की लंबी फेहरिस्त है। प्रतिनिधियों ने ग्राम सभा की स्वतंत्रता बहाल करने, ग्राम कचहरी को सर्वसुविधा संपन्न बनाने और छठे राज्य वित्त आयोग की राशि ग्राम पंचायत, पंचायत समिति व जिला परिषद को जारी करने की मांग की। सोलहवें वित्त आयोग की राशि के लिए केवल SBI में खाता खोलने का आदेश वापस लेकर अन्य सार्वजनिक बैंकों का विकल्प देने और अनटाइड राशि पर लगी रोक हटाने की भी मांग उठी।
इसके साथ OSR नियमावली तत्काल लागू कर उसमें मोबाइल टावरों को शामिल करने और BSPRI की कथित अनियमितताओं की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गयी। पंचायती राज विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने, मुख्यमंत्री के सेवा संकल्प व कायाकल्प अभियान की बाधाएं दूर करने तथा पंचायतों के अधिकार सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया। प्रदर्शन स्थल पर तख्तियां भी बहुत कुछ कह रही थीं। ‘ग्राम सभा की स्वतंत्रता बहाल करो’ और ‘सोलहवें वित्त आयोग में एक बैंक का फरमान वापस लो’ जैसे नारों के बीच प्रधानमंत्री आवास योजना में कटे नाम जोड़ने और आत्मसुरक्षा के लिए आवश्यकतानुसार आर्म्स लाइसेंस देने जैसी बातें भी तख्तियों पर लिखी दिखीं।
बहरहाल, पंच-सरपंच संघ ने ग्राम कचहरी के लिए अलग से 11 सूत्री मांगपत्र सौंपा। इसमें ग्राम कचहरी को आवश्यक सुविधाएं व संसाधन देने तथा प्रहरी-सह-सफाई कर्मियों और अन्य कर्मियों का भत्ता व मानदेय सुनिश्चित करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। दोनों नेताओं ने दो टूक कहा कि सरकार को सात दिनों के भीतर ठोस निर्णय लेकर कार्रवाई करनी होगी, केवल मौखिक आश्वासन स्वीकार नहीं होगा। चेतावनी दी गयी कि तय अवधि में मांगें पूरी नहीं हुईं तो करीब ढाई लाख त्रिस्तरीय पंचायत एवं ग्राम कचहरी प्रतिनिधियों को एकजुट कर व्यापक और निर्णायक आंदोलन होगा। जरूरत पड़ी तो मंत्री आवास का फिर घेराव किया जाएगा। नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि ग्राम सभा की स्वतंत्रता और पंचायतों के वास्तविक अधिकारों के लिए है।











