पंचायतों के अधिकार के लिए पटना में बिहार मुखिया संघ की दो टूक चेतावनी, प्रदर्शन पर बोले अध्यक्ष मिथिलेश राय- अब समझौता नहीं

Radio Mukhiyajee | Patna

बिहार में पंचायती राज व्यवस्था और ग्राम कचहरी को सशक्त बनाने की मांग को लेकर आज गुरुवार 15 अक्टूबर को घेराव-सह-प्रदर्शन होगा। यह प्रदर्शन बिहार मुखिया महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय के आह्वान पर त्रिस्तरीय एवं ग्राम कचहरी प्रतिनिधि संगठन, बिहार के बैनर तले आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम सुबह 11 बजे दरोगा प्रसाद राय ट्रस्ट भवन से पंचायती राज मंत्री आवास तक होगा। मुखियाजी डॉट कॉम से जुड़े रेडियो मुखियाजी के प्रतिनिधि से खास बातचीत में मिथिलेश कुमार राय ने प्रदर्शन की रूपरेखा और इसके उद्देश्य पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ग्राम स्वराज पंचायतों का अधिकार है और अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा। पंचायतों को सशक्त बनाना और प्रतिनिधियों को उनका अधिकार दिलाना ही संगठन का संकल्प है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन टकराव के लिए नहीं, बल्कि पंचायतों को उनका वाजिब हक दिलाने के लिए है।

उन्होंने कहा कि त्रिस्तरीय पंचायत और ग्राम कचहरी प्रतिनिधियों की विभिन्न समस्याओं का समाधान नहीं होने से प्रतिनिधियों में नाराजगी है। संगठन ने कुल 14 प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें ग्राम सभा की स्वतंत्रता बहाल करने, ग्राम कचहरी को सर्वसुविधा संपन्न बनाने, छठे राज्य वित्त आयोग की राशि जारी करने और जिला परिषद को इससे वंचित रखने का कारण स्पष्ट करने की मांग शामिल है। सोलहवें वित्त आयोग से जुड़े आदेशों को वापस लेने, बीएसपीआरआई में कथित घोटाले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने, ओएसआर नियमावली को अविलंब लागू कर उसमें मोबाइल टावर को शामिल करने और पंचायत प्रतिनिधियों के पत्रों का जवाब समय-सीमा में देने की मांग भी रखी गयी है। संगठन ने मुख्यमंत्री के सेवा संकल्प एवं कायाकल्प अभियान में बाधा डालना बंद करने, जिला परिषद पटना आदि में अधिकारियों द्वारा बरती गयी अनियमितता पर कार्रवाई करने और पंचायती राज विभाग में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग भी की है। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में ग्राम सभा के महत्व को देखते हुए काटे गए नाम जोड़ने की मांग है। पंच-सरपंच संघ द्वारा प्रस्तावित 11 सूत्री मांगों, प्रहरी सह सफाई कर्मी की स्वीकृति और प्रतिनिधियों एवं कर्मियों के मानदेय में बढ़ोतरी सहित सभी मांगों को पूरा करने के लिए भी कहा गया है।

मांगों पर बात करते हुए मिथिलेश कुमार राय ने कहा कि ये सभी मांगें पंचायतों की मजबूती से जुड़ी हैं। ग्राम सभा की स्वतंत्रता, ग्राम कचहरी का सशक्तिकरण, पंचायतों को वित्तीय अधिकार और पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना ही संगठन की मुख्य मांग है। उनका कहना है कि पंचायतों को वास्तविक अधिकार मिलेंगे, तभी गांव की सरकार मजबूत होगी और बिहार का विकास जमीन पर दिखेगा। बता दें कि पंचायतों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाना मिथिलेश कुमार राय की पहचान रही है। उन्हीं के प्रयासों से आज पंचायत प्रतिनिधियों के तमाम संगठन एक मंच पर आ सके हैं। इस एकजुटता पर उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की एकता ही उनकी ताकत है और जब सभी संगठन एक मंच पर हैं, तो आवाज भी मजबूत है। उनके निरंतर प्रयास और लगातार मांग का ही नतीजा है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार पंचायतों के परिसीमन के लिए न केवल तैयार हुई, बल्कि इसे विधिवत कैबिनेट से स्वीकृत भी किया गया। सरकार के प्रति सकारात्मक रुख दोहराते हुए राय ने कहा कि संगठन सरकार का विरोधी नहीं, बल्कि पंचायतों के हक का पैरोकार है। परिसीमन पर सरकार की सकारात्मक पहल से उम्मीद बनी है कि बाकी मांगों पर भी संवाद और सहयोग से समाधान निकलेगा।