Mukhiyajee Reporter | Patna
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में 22 एजेंडों पर मुहर लगी। इसमें सबसे प्रमुख राजधानी पटना से आसपास के शहरों के बीच सीधे तेज संपर्क स्थापित करने के लिए रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) तैयार किया जाना है। इसका उद्देश्य तेज और सुगम तरीके से संबंधित चार स्थानों और राजधानी के बीच सीधा संपर्क स्थापित करना है। इसमें पटना-गयाजी, पटना-बेगूसराय, पटना-हाजीपुर (सोनपुर एयरपोर्ट) और पटना (एयरपोर्ट) से आरा के बीच सीधे रैपिड ट्रांजिट सिस्टम की कवायद शुरू हो गयी है। राजधानी से इन शहरों के बीच सीधे विशेष ट्रेन सेवा का परिचालन किया जाएगा। इसका डीपीआर (विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन) तैयार करने के लिए कैबिनेट ने 31.59 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है।
कैबिनेट में लिए गए फैसलों की विस्तृत जानकारी मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने सूचना भवन के सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दी। उन्होंने कहा कि आरआरटीएस का डीपीआर तैयार होने के बाद ही इसकी पूरी रूपरेखा स्पष्ट होगी। मसलन इस परियोजना की लागत कितनी होगी, किन-किन रूट से होकर गुजरेगी, कितने समय में परियोजना पूरी हो जाएगी जैसी तमाम बातों की विस्तृत जानकारी डीपीआर तैयार होने के बाद मिलेगी। उन्होंने कहा कि पटना और इसके आसपास के प्रमुख इलाकों में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या तथा प्रमुख आर्थिक केंद्रों में तेजी से बढ़ रही गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए इस विशेष रेल नेटवर्क को तेयार किया जा रहा है। इससे पटना समेत आसपास के इलाकों में बन रहे सैटेलाइट टाउनशिप को आपस में जोड़ने और इसे विकसित करने में मदद मिलेगी।
सरकारी भवनों पर लगेगी सोलर एनर्जी : अपर मुख्य सचिव ने कहा कि जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक राज्य के सरकारी या सरकार के अधीन भवनों पर 500 मेगावाट क्षमता के ग्रिड कनेक्टेड रूफटॉप सोलर पावर प्लांट का रिन्यूवल इनर्जी सर्विस कंपनी (आरईएससीओ) मोड में इसे लगाने की स्वीकृति एवं संबंधित विभागों के स्तर से आरईएससीओ डेवलपर के साथ सौर ऊर्जा संयंत्रों से उत्पादित ऊर्जा की खरीद के लिए पॉवर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) किए जाने की स्वीकृति प्रदान करना जरूरी है। इसकी स्वीकृति मंत्रिपरिषद के स्तर पर दी गई है।
दलहन को बढ़ावा देने के लिए खास पहल : राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन योजना के अंतर्गत खरीफ, रबी एवं गरमा मौसम में विभिन्न दलहनी फसलों को बढ़ावा देने के लिए 79 करोड़ 84 लाख 61 हजार रुपये की स्वीकृति योजना क्रियान्वयन के लिए दी गयी। योजना का मुख्य उदेश्य राज्य को दलहन में आत्मनिर्भर बनाना, दलहनी फसलों का क्षेत्रफल विस्तार और दलहन का उत्पादन बढ़ाना है। साथ ही भंडारण एवं प्रसंस्करण को बढ़ावा देना है, ताकि किसानों की आय में बढ़ोतरी हो। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन (नेशनल ई-गर्वेंस प्लान कृषि) के अंतर्गत एग्री स्टैक परियोजना अधीन फार्मर रजिस्ट्री एवं डिजिटल क्रॉप के लए 154 करोड़ रुपये की लागत से योजना के कार्यान्वयन की स्वीकृति दी गयी। इसमें डिजिटल डाटाबेस तैयार करना, डेटा और डिजिटल तकनीकों के माध्यम से राज्य की कृषि व्यवस्था को आधुनिक बनाकर किसानों की आय में बढ़ोतरी करना है। उन्होंने कहा कि चौथे कृषि रोड मैप के अंतर्गत खाद्यान्न एवं वाणिज्यिक फसलों को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन की स्वीकृति दी गयी।
बीएआईडीसीएल का किया गया गठन : कैबिनेट ने राज्य में मत्स्य और जलीय कृषि क्षेत्र के बेहतर विकास के लिए बिहार एक्वॉकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एवं डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएआईडीसीएल) के गठन को मंजूरी दी गई। इससे इस क्षेत्र में मौजूद समस्याओं को दूर करने में मदद मिलेगी। पर्याप्त अवसंरचना यानी मत्स्य हैचरी, फिश फार्म, फीड मिल, कोल्ड चेन, आइस प्लांट, फिश मार्केट, प्रोसेसिंग यूनिट समेत अन्य शामिल हैं। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट के तहत कॉम्फेड के अंतर्गत बिल्क मिल्क कूलर, डाटा प्रोसेसर आधारित दुग्ध संग्रहण इकाई एवं दूध मिलावट जांच मशीन की स्थापना करना शामिल है।

टाउनशिप का होगा क्षेत्र विस्तार : चौधरी ने कहा कि कैबिनेट के एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में पटना (पाटलिपुत्र) और मुजफ्फरपुर (तिरहुत) में बन रहे टाउनशिप का क्षेत्र विस्तार होगा। साथ ही पाटलिपुत्र, हरिहरनाथपुर (सोनपुर), मगध (गयाजी) और तिरहुत (मुजफ्फरपुर) के कोर क्षेत्र एवं उसके बाहर विशेष क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, सेवाओं और संबद्ध संरचनाओं के विकास के लिए टाउनशिप प्लानिंग स्कीम के अतिरिक्त आवश्यकता के अनुसार भूमि खरीद या भूमि अधिग्रहण की स्वीकृति प्रदान की गयी। उन्होंने कहा कि राज्य में ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के सुनियोजित विकास एवं परियोजनाओं के कार्यान्वयन और अन्य तकनीकी सहायता के लिए अहमदाबाद स्थित सीईपीटी (सेंटर फॉर एनवायरमेंटल प्लानिंग एंड टेक्नोलॉजी) विश्वविद्यालय को तकनीकी सहायता इकाई के रूप में चयन करने की स्वीकृति प्रदान की गयी है।
विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज के लिए राशि जारी : कैबिनेट ने भागलपुर जिला में गंगा नदी पर विक्रमशीला सेतु पर बेली ब्रिज निर्माण कार्य, नवीन सस्पेंडेड स्लैब निर्माण कार्य और सेतु के संपूर्ण भाग की मरम्मति और इसे फिर से बनाने के लिए 126 करोड़ 25 लाख रुपये की अनुमानित व्यय की स्वीकृति दी है।
मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना का बढ़ा कार्यकाल : मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना को अगले 5 वर्ष (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31) तक विस्तारित करने की अनुमति दी गयी। इस भत्ता के लिए 300 करोड़ रुपये व्यय की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गयी है। इसके अलावा विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित 10 राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों में विभिन्न तकनीकी संकायतों में पीजी (एम.टेक) पठन-पाठन पूर्व से ही प्रारंभ है। ऐसे अन्य कोर्सों के लिए कुल 76 शैक्षणिक पद की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इसमें प्राध्यापक के 9, सह-प्राध्यापक के 29 और सहायक प्राध्यापक के 38 पद शामिल है।
एम्स पटना को 26.78 एकड़ अतिरिक्त जमीन : पटना में मौजूद एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) को अतिरिक्त सुविधा प्रदान करने के लिए दानापुर के पास भुसौला में 26.76 एकड़ जमीन के अधिग्रहण करने की अनुमति दी गयी है। इसके लिए 348 करोड़ 89 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इसमें सुपर स्पेशलिटी ब्लाक, आंख केंद्र समेत अन्य आवश्यक भवन बनाने की योजना है। इसके अलावा मधुबनी के अंतर्गत लखनौर अंचल में बेहट, मुंगेर के मय एवं शंकरपुर मौजा और मुजफ्फरपुर के मुशहरी उर्फ राधा नगर में 5-5 एकड़ जमीन केंद्रीय विद्यालय की स्थापना के लिए 30 वर्षों के लिए एक रुपये के टोकन पर केंद्र सरकार के केंद्रीय विद्यालय संगठन को दी गयी है।





