पश्चिम बंगाल के गाजोल में पहली बार कमल खिला, भाजपा की ऐतिहासिक जीत में कुमार प्रणय का अहम योगदान

Rajesh Thakur | Patna
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद मालदा जिले की गाजोल सीट अचानक चर्चा में आ गयी है। सियासी पंडित इसे सिर्फ एक चुनावी सीट नहीं, बल्कि भाजपा की नयी राजनीतिक प्रयोगशाला के रूप में गिन रहे हैं। वर्षों तक पहले वामपंथ और बाद में TMC के प्रभाव वाले इस क्षेत्र में पहली बार भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। भाजपा प्रत्याशी ने 38 हजार से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल कर राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है और इस जीत के पीछे एक नाम लगातार चर्चा में है, वह है मुंगेर से भाजपा विधायक कुमार प्रणय। बिहार के अंग क्षेत्र की राजनीति में अपनी सक्रिय शैली और जमीनी संपर्क के लिए पहचाने जाने वाले कुमार प्रणय ने चुनाव के दौरान गाजोल विधानसभा क्षेत्र में डेरा डालकर, खासकर बिहारी मतदाताओं के बीच भाजपा के पक्ष में ऐसा माहौल बनाया, जिसने अंततः चुनावी गणित बदल दिया।

मालदा में काउंटिंग के दौरान जीत की खबर पर खुशी मनाते मुंगेर के विधायक कुमार प्रणय।

बिहारी वोटरों के बीच चला विश्वास अभियान : चुनावी अभियान के दौरान कुमार प्रणय ने गाजोल विधानसभा क्षेत्र के उन इलाकों में लगातार जनसंपर्क किया, जहां बिहार मूल के मतदाताओं की संख्या निर्णायक मानी जाती है। छोटी बैठकों, मोहल्ला संवाद, सामाजिक संपर्क और घर-घर पहुंच के जरिए उन्होंने भाजपा के पक्ष में भरोसे का माहौल तैयार किया। सियासी पंडितों का मानना है कि बिहारी मतदाताओं का संगठित झुकाव इस जीत का निर्णायक फैक्टर बना। गाजोल सीट का राजनीतिक इतिहास भी इस जीत को खास बनाता है। एक दौर में यहां वामपंथी दलों का मजबूत प्रभाव था, बाद में तृणमूल कांग्रेस ने इस क्षेत्र पर पकड़ बनायी। लेकिन इस बार भाजपा ने न सिर्फ सेंध लगायी, बल्कि रिकॉर्ड अंतर से जीत दर्ज कर नया राजनीतिक इतिहास रच दिया। पहली बार इस सीट पर कमल खिलने से भाजपा खेमे में उत्साह का माहौल है।

बिहार से बंगाल तक बढ़ता राजनीतिक प्रभाव : सियासी पंडितों के अनुसार, अब कुमार प्रणय की इस भूमिका को सिर्फ एक विधायक की सक्रियता नहीं, बल्कि बिहार भाजपा के विस्तारवादी राजनीतिक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। मुंगेर से निकल कर बंगाल की जमीन पर चुनावी प्रभाव छोड़ना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में बिहार के युवा भाजपा नेताओं की भूमिका राष्ट्रीय राजनीति में और व्यापक हो सकती है। गाजोल की यह जीत भाजपा के लिए सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि पूर्वी भारत की बदलती राजनीतिक धारा का मजबूत संकेत बनकर उभरी है। बता दें कि भाजपा के चिन्मयदेव बर्मन ने TMC के प्रसन्नजीत दास को 38 हजार 192 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया। चिन्मय को 131541 तो प्रसन्नजीत को 93349 वोट मिले। 21 राउंड की गिनती हुई और तीसरे स्थान पर सीपीएम के क्षितिज चंद्र सरकार को महज 5949 वोटों से संतोष करना पड़ा। इसी तरह, चौथे नंबर पर कांग्रेस के प्रेम चौधरी रहे। उन्हें 5050 वोट आए।

यह सिर्फ सीट नहीं, विचार की जीत है : विधायक कुमार प्रणय काउंटिंग के दिन कल मालदा में थे और मालदा उत्तरी के सांसद के साथ जीत का जश्न मना रहे थे। जीत के बाद कुमार प्रणय ने मुखियाजी डॉट कॉम से बातचीत में कहा कि यह सिर्फ एक विधानसभा सीट की जीत नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद, विकास और संगठन की राजनीति की जीत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की संगठन क्षमता और बूथ स्तर तक मजबूत रणनीति ने पूरे देश में भाजपा को नयी ऊर्जा दी है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार कर कार्यकर्ताओं में आत्मविश्वास पैदा किया। उन्होंने कहा कि भाजपा के बंगाल प्रभारी मंगल पांडेय की रणनीतिक मेहनत भी सफल रही। गाजोल की जीत साबित करती है कि जब कार्यकर्ता समाज के बीच जाकर विश्वास का संवाद बनाता है, तो बेशक वह इतिहास बदलने में सहयोग करता है।