‘641 अनुदानित स्कूलों का क्या होगा’ – विधान पार्षद जीवन कुमार ने शून्यकाल में उठाया मुद्दा

Rajesh Thakur | Patna
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान पार्षद जीवन कुमार ने गुरुवार को बिहार विधान परिषद के शून्यकाल के दौरान राज्य के 641 अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों के भविष्य का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने इस विषय को लिखित रूप में सदन के पटल पर रखते हुए सरकार से स्पष्ट और ठोस निर्णय की मांग की। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग स्वयं यह स्वीकार कर चुका है कि वर्ष 2011 की विनियमावली में त्रुटियां हैं, फिर भी उसमें संशोधन की प्रक्रिया अत्यंत धीमी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब विभाग को नियमों की खामियों की जानकारी है, तो सुधार में देरी क्यों हो रही है?

विधान पार्षद ने ध्यान दिलाया कि 31 मार्च 2026 को इन 641 विद्यालयों की ‘कोड निलंबन मुक्त’ अवधि समाप्त हो रही है। ऐसे में विद्यालयों के संचालन, मान्यता और शिक्षकों-छात्रों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारी सो रहे हैं और शिक्षक-छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने सरकार से लिखित आश्वासन की मांग करते हुए कहा कि जब तक शिक्षा विभाग अपनी नियमावली में आवश्यक सुधार नहीं कर लेता, तब तक इन विद्यालयों की मान्यता 31 मार्च 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2029 तक की जाए।

उन्होंने कहा कि मान्यता की अवधि बढ़ाने से विद्यालयों के प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों में निरंतरता बनी रहेगी तथा शिक्षक-छात्रों में असमंजस की स्थिति खत्म होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षक और छात्र अकेले नहीं हैं, उनका प्रतिनिधि सदन में उनके अधिकारों के लिए खड़ा है। बहरहाल, जीवन कुमार शिक्षकों, स्कूलों और विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों को उच्च सदन में लगातार उठा रहे हैं। ऐसे में अब देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और शिक्षा विभाग 2011 की विनियमावली में संशोधन को लेकर कितनी तेजी दिखाता है। फिलहाल, 641 विद्यालयों से जुड़े हजारों शिक्षक-छात्रों की नजरें सरकार के निर्णय पर टिकी हैं।