बिहार में नए मुख्यमंत्री पर 48 घंटा और, बैठकों का दौर जारी; व्याकुल नहीं होना है

Rajesh Thakur | Patna

बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर सियासी हलचल अपने चरम पर है, लेकिन अंतिम फैसले के लिए अभी कम से कम 48 घंटे का इंतजार और करना पड़ सकता है। सत्ता के गलियारों में लगातार बैठकों का दौर जारी है। यह तो लगभग तय हो चुका है कि मुख्यमंत्री इस बार बीजेपी कोटे से ही बनेगा। इसे लेकर भारतीय जनता पार्टी ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पर्यवेक्षक बनाकर स्थिति को नियंत्रित और संतुलित रखने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके पूर्व बिहार प्रभारी विनोद तावड़े ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा से भी बात की थी। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री आवास पर शनिवार की तरह आज रविवार को भी नीतीश कुमार से मंत्रियों के मिलने का सिलसिला जारी है।

दरअसल, पटना से लेकर दिल्ली तक नेताओं के बीच मंथन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जातीय संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, आगामी चुनावी रणनीति सहित अन्य बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए अंतिम नाम पर सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। सियासी पंडितों के अनुसार, विधायक दल की बैठक कब बुलायी जाएगी और किस तारीख को नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी, यह तो अभी तय नहीं है, लेकिन इसके लिए 48 घंटा अहम है। इसे लेकर बीजेपी नेतृत्व पूरी रणनीति के तहत आगे बढ़ रहा है, ताकि सत्ता परिवर्तन का संदेश स्पष्ट और नियंत्रित तरीके से जनता तक पहुंचे। पर्यवेक्षक के रूप में शिवराज सिंह चौहान की नियुक्ति यह संकेत देती है कि पार्टी इस बार नेतृत्व चयन को लेकर कोई चूक नहीं करना चाहती। हालांकि, यह सब केवल खानापूर्ति है। कहा जाता है कि नाम तो तय है। बस समय को देखते हुए उस पर मुहर लगनी है। चर्चा तो यह भी है कि या तो सम्राट चौधरी अथवा निशांत कुमार, बीच में तीसरे के आने की संभावना कम ही है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मौजूदा कैबिनेट की अंतिम बैठक हो सकती है। इस बैठक के बाद सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। सूत्रों की मानें तो भाजपा के आलाकमान इसी बहाने भांप भी रहे हैं कि किनके मन में क्या है..? यही वजह है कि लगातार बैठकों के जरिए हर संभावित नाम पर किस ‘गुट’ की क्या रिएक्शन है। भले ही बीजेपी सहित एनडीए के सभी नेता बोले कि हम सब एक हैं, यदि ऐसा होता तो नेताओं को ‘हिडेन’ बनने की क्या जरूरत है। पर्दे के पीछे से ‘सियासी’ चाल चलने की क्या जरूरत है। यदि एक विचार रहता, एकता रहती तो अब तक सम्राट चौधरी के नाम का ऐलान हो गया रहता और यह भी ऐलान हो गया रहता कि नीतीश कुमार किस डेट को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। वैसे 14 अप्रैल डेट माना जा रहा है, लेकिन दावे के साथ फाइनल नहीं कह सकते हैं।

बहरहाल, बिहार की सियासत इस वक्त जबरदस्त मोड़ पर खड़ी है। एक ओर रियल हीरो, दूसरी ओर ‘हिडेन नेताओं’ की ओर से खड़े किये गये ‘अटपटे हीरोज’। ‘हिडेन नेताओं को भी लगे कि उनके ‘प्रॉपगंडा’ को गंभीरता से लिया जा रहा है। ऐसा नहीं हो कि यही ‘प्रॉपगंडा’ साजिश रचने वालों के लिए ‘प्रॉपगंदा’ साबित हो। शिवराज सिंह चौहान को इस IPL के मौसम में बैट थमा दिया गया है। अब नजरें अगले 48 घंटों पर टिकी हैं। व्याकुल नहीं होना है, यही वो वक्त है, जब पर्दे के पीछे चल रही पूरी ‘हिडेन पॉलिटिक्स’ खुलकर सामने आ सकती है।

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