पटना में खेलते-खेलते खुले नाले में गिरी बच्ची, मौत; नगर परिषद की लापरवाही पर फूटा गुस्सा

Fulwari Sharif (Ajeet) : फुलवारीशरीफ थाना क्षेत्र के ईसापुर इलाके में आज शनिवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आयी। खुले नाले में गिरने से दो वर्ष की मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत हो गयी। इस हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम पसर गया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं स्थानीय लोगों ने नगर परिषद की गंभीर लापरवाही को इस हादसे की मुख्य वजह बताते हुए प्रशासन के खिलाफ गहरा आक्रोश जताया है। जानकारी के अनुसार मासूम बच्ची अपने घर के बाहर अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी। तभी उसका संतुलन बिगड़ गया और खुले नाले में जा गिरी। नाले में पानी का बहाव काफी तेज था, जिसके कारण बच्ची कुछ ही क्षणों में पानी के साथ बहकर लापता हो गयी। करीब दो घंटे तक लगातार मशक्कत करने के बाद बच्ची को नाले से बाहर निकाला गया। उसे तत्काल इलाज के लिए एम्स पटना ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार बच्ची की मौत नाले में डूबने से हुई है।

घटना की जानकारी देते हुए बच्ची के पिता सद्दाम हुसैन ने बताया कि वे मूल रूप से असम राज्य के निवासी हैं और वर्तमान में परिवार के साथ ईसापुर इलाके में किराए के मकान में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी दो वर्षीय पुत्री खदीजा घर के सामने खेल रही थी। इसी दौरान वह अचानक लापता हो गयी। काफी देर तक खोजबीन करने के बाद जब बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला तो परिजनों को शक हुआ कि कहीं कोई उसे उठाकर तो नहीं ले गया। पुलिस मौके पर पहुंची और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज खंगालने के दौरान बच्ची के नाले में गिरने की पूरी घटना सामने आयी। इसके बाद परिवार के लोग और स्थानीय युवक नाले में उतर गए और काफी मशक्कत के बाद बच्ची के शव को बाहर निकाला गया। इस दर्दनाक हादसे के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों का आरोप है कि ईसापुर इलाके में लंबे समय से कई जगह नाले खुले हुए हैं। कई बार राहगीरों की गाड़ियां इन खुले नालों में फंसकर क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। लोगों का कहना है कि कई बार नगर परिषद को लिखित और मौखिक शिकायत दी गयी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। वहीं इस हादसे के मामले में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी ने बताया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दे दिए गए हैं और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित कर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

राय चौक इलाके में हुए दर्दनाक हादसे ने सिर्फ एक मासूम की जिंदगी नहीं छीनी, बल्कि एक गरीब मजदूर परिवार की पूरी दुनिया उजाड़ दी। पेट की आग बुझाने के लिए घर-गांव छोड़कर दूसरे शहर में मेहनत करने आए पिता की गोद अब हमेशा के लिए सूनी हो गयी है। दो वर्ष की मासूम खतीजा की खुले नाले में गिरकर हुई मौत ने परिवार को ऐसा जख्म दिया है, जिसकी टीस शायद जिंदगी भर कम नहीं होगी। यह परिवार रोज मजदूरी कर किसी तरह जीवन की गाड़ी खींच रहा था। पिता सुबह होते ही काम की तलाश में निकल जाता था और शाम को लौटकर बच्चों की मुस्कान में अपनी सारी थकान भूल जाता था। परिवार में चार वर्ष का एक बेटा और दो वर्ष की बेटी खतीजा थी। दोनों बच्चों की मासूम हंसी ही इस परिवार की असली पूंजी थी। गरीबी जरूर थी, लेकिन बच्चों की किलकारी घर को खुशियों से भर देती थी। हादसे वाले दिन भी सब कुछ सामान्य था। खतीजा घर के दरवाजे पर खेल रही थी। मां घर के काम में व्यस्त थी और पिता रोज की तरह मजदूरी करने गया हुआ था। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही पलों में खुशियों से भरा यह घर हमेशा के लिए मातम में बदल जाएगा। जब बच्ची अचानक नजरों से ओझल हुई तो घर में अफरा-तफरी मच गयी। मां बदहवास होकर इधर-उधर दौड़ने लगी।

जब काफी देर बाद बच्ची का शव नाले से निकाला गया तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बेटी का शव देखकर पिता की हालत ऐसी हो गयी, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। वह बेसुध होकर बार-बार यही कहता रहा- ‘मैं मजदूरी करने गया था। अगर उस वक्त घर पर रहता तो शायद मेरी बेटी बच जाती।’ मां तो बार-बार अपनी बेटी का नाम लेकर बेहोश हो जा रही है। चार साल का मासूम भाई इस हादसे को समझ नहीं पा रहा है। वह बार-बार अपनी मां और आसपास के लोगों से पूछ रहा है। किसी के पास उस बच्चे को समझाने के लिए शब्द नहीं हैं। जिस घर में बच्चों की खिलखिलाहट गूंजती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है।