कल्याणपुर वाली माँ – 1 : माटी से लगाव ने कल्याणपुर को बनाया ब्रांड, क्लीनिक से फर्म तक हर नाम में गांव; डॉ नीतीश चंद्र दुबे की अनोखी पहचान

Mukhiyajee Reporter | Patna (Rajesh)

मुंगेर के हवेली खड़गपुर का कल्याणपुर गांव आज देश-दुनिया में एक ब्रांड बन चुका है। गांव की माटी से लगाव रखने वाले Burnett Homeopathy कंपनी के डायरेक्टर डॉ नीतीश चंद्र दुबे (Dr Nitish Chandra Dube) की अगुवाई में हुई कल्याणपुर (Kalyanpur) की दुर्गापूजा, पांच करोड़ की लागत का भव्य पंडाल, सितारों की महफिल और ‘कल्याणपुर वाली माँ’ की आस्था ने इस गांव को नयी पहचान दी है। डॉ नीतीश चंद्र दुबे ने नौवीं पूजा की रात पूजा पंडाल में मुखियाजी डॉट कॉम के संपादक से बात की। पंडाल-मेला निरीक्षण तथा उनसे बातचीत के आधार पर ‘कल्याणपुर वाली माँ’ की सभी टॉप-10 कड़ियों में से पढ़ें पहली कड़ी…

किसी गांव की पहचान अक्सर उसकी मिट्टी से बनती है, लेकिन कल्याणपुर की पहचान आज उसके एक बेटे के लगाव से भी बन रही है। मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर प्रखंड का यह गांव आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ब्रांड बन चुका है। इस सफर के सूत्रधार हैं डॉ नीतीश चंद्र दुबे, जिन्हें अपने गांव की माटी से बेहद लगाव है।
यह लगाव सिर्फ भावनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके कामकाज के नाम में भी दिखता है। बिहार सहित अन्य राज्यों में फैले अपने क्लीनिकों के नाम में उन्होंने ‘कल्याणपुर’ शब्द जोड़ लिया है। इतना ही नहीं, अपने फर्म के नाम में भी उन्होंने गांव को जगह दी है। फर्म का नाम है हरिओम होम्यो क्लीनिक कल्याणपुर और डॉ दुबे इसके एमडी हैं। यानी जहां-जहां उनका क्लीनिक है, वहां-वहां कल्याणपुर का नाम भी पहुंच रहा है। मरीज जब क्लीनिक का बोर्ड पढ़ते हैं, तो उनके सामने एक ऐसे गांव का नाम आता है, जो शायद उन्होंने पहले कभी सुना भी न हो।

माँ दुर्गा की मूर्ति के साथ डॉ नीतीश चंद्र दुबे।

डॉ दुबे की पहचान सिर्फ एक होम्योपैथ चिकित्सक की नहीं है। वे Burnett Homeopathy कंपनी के डायरेक्टर भी हैं और राज्य तथा अंतरराज्यीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजन कराते रहते हैं। जर्मनी, दुबई, मलेशिया, फ्रांस और लंदन जैसे स्थानों पर वे कार्यक्रम करा चुके हैं। उनकी कोशिश रहती है कि हर साल कम से कम एक इवेंट विदेश में जरूर हो, जबकि देश के भीतर उनके आयोजन लगातार चलते रहते हैं। दिलचस्प यह है कि इन तमाम मंचों पर जब भी बात आती है, कल्याणपुर का नाम उनके साथ जुड़ा रहता है।
एक छोटे से गांव से निकलकर दुनिया के कई शहरों तक पहुंचने वाला यह सफर बताता है कि बड़ी सोच के लिए बड़े शहर का पता जरूरी नहीं होता। डॉ दुबे ने अपनी जड़ों को छोड़ा नहीं, बल्कि उन्हीं जड़ों को अपनी सबसे बड़ी पहचान बना लिया। यही वजह है कि आज जब कल्याणपुर की चर्चा होती है, तो साथ में उनका नाम भी लिया जाता है, और जब उनका नाम आता है तो कल्याणपुर का जिक्र खुद-ब-खुद हो जाता है।

बहरहाल, इन दिनों डॉ दुबे इसलिए भी जबरदस्त चर्चा में हैं कि उन्होंने वर्षों से चली आ रही परंपरा को निभाते हुए इस बार भी कल्याणपुर में दुर्गापूजा का ऐसा आयोजन कराया, जिसकी गूंज पूरे बिहार में सुनी गयी। इस आयोजन की भव्यता, इसके पीछे की सोच और इससे जुड़े किस्से ‘कल्याणपुर वाली माँ’ श्रृंखला की अगली कड़ियों में पढ़े जा सकते हैं। बता दें कि 2024 के नवंबर में हरिओम होमियो कल्याणपुर का नया ब्रांच खुला था, जिसका उद्घाटन केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने किया था। तब उन्होंने कहा था कि इस क्लीनिक के प्रोपराइटर डॉ. नीतीश दुबे काबिल और अच्छे होमियोपैथिक चिकित्सक हैं। इनकी अपनी एक सशक्त पहचान है और उतनी ही अधिक प्रसिद्धि भी है। ये जब विद्यार्थी जीवन में यानी होमियोपैथिक की पढ़ाई कर रहे थे, उसी समय से ये हमसे जुड़े हुए हैं। डॉ दुबे ने पुरानी और असाध्य बीमारियों मसलन, पुरुष और महिला रोग, लकवा, त्वचा, दाने, मानसिक, यौन और शारीरिक विकारों से पीड़ित लाखों रोगियों का इलाज किया है।