Mukhiyajee Reporter | Patna
बिहार के संग्रामपुर में जन्मे और पटना में पले-बढ़े अश्वनी आनंद अब दुनिया के अग्रणी क्लाउड प्लेटफॉर्म में शामिल अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) के साथ काम करेंगे। उन्हें लंदन स्थित AWS के ऑटोमेटेड रीजनिंग ग्रुप में नौकरी मिली है और वह जल्द ही अपना कार्यभार संभालेंगे। अश्वनी का काम कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर सिस्टम को गणित एवं तर्क के जरिए अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने से जुड़ा है। अश्वनी का पैतृक गांव सीतामढ़ी जिले में है। उनका जन्म संग्रामपुर में हुआ, जबकि उनका पालन-पोषण पटना में हुआ। उनकी स्कूली शिक्षा भी पटना में हुई। उन्होंने दसवीं तक डीएवी पब्लिक स्कूल, ट्रांसपोर्ट नगर में पढ़ाई की और इसके बाद बारहवीं तक डीएवी (बीएसईबी) से शिक्षा हासिल की।

गणित में शुरू से गहरी रुचि ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित चेन्नई मैथमेटिकल इंस्टीट्यूट (CMI) तक पहुंचाया। यहां उन्होंने गणित एवं कंप्यूटर विज्ञान में स्नातक और इसके बाद कंप्यूटर विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। CMI में पढ़ाई के दौरान गणित के प्रति उनका लगाव धीरे-धीरे शोध की दुनिया की ओर मुड़ता गया और यही आगे उनके करियर की दिशा बना। उन्होंने उच्च शिक्षा के दौरान ही अंतरराष्ट्रीय शोध का अनुभव हासिल करना शुरू कर दिया। उन्हें फ्रांस के बोर्दो और पेरिस के प्रतिष्ठित संस्थानों में शोध-प्रशिक्षण का अवसर मिला। इसके बाद उन्होंने अमेजन वेब सर्विसेज के ऑटोमेटेड रीजनिंग ग्रुप में दो बार इंटर्नशिप की। इन अनुभवों के बाद उनका शोध-सफर जर्मनी के विश्वप्रसिद्ध मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर सॉफ्टवेयर सिस्टम्स (MPI-SWS) तक पहुंचा, जहां उन्होंने कंप्यूटर विज्ञान में पीएचडी की। आज वह कंप्यूटर विज्ञान के ऐसे क्षेत्र में शोध कर रहे हैं, जिसमें गणितीय तर्क और कंप्यूटर सिस्टम की विश्वसनीयता के बीच संबंध पर काम किया जाता है।
दरअसल, अश्वनी के शोध को सामान्य भाषा में समझें तो उनका काम यह पता लगाने से आगे जाता है कि कोई सॉफ्टवेयर कई बार चलाने पर सही काम करता है या नहीं। उनका क्षेत्र उन तरीकों से जुड़ा है, जिनमें गणित और तर्क की मदद से किसी कंप्यूटर सिस्टम के सही व्यवहार को औपचारिक रूप से प्रमाणित करने का प्रयास किया जाता है। किसी जटिल सॉफ्टवेयर को हर संभावित परिस्थिति में चलाकर जांचना व्यावहारिक रूप से कठिन हो सकता है। ऐसे में गणितीय प्रमाण यह स्थापित करने में मदद कर सकता है कि किसी सिस्टम में निर्धारित परिस्थितियों के भीतर कुछ महत्वपूर्ण गलतियां नहीं होंगी। इसे एक आसान उदाहरण से समझें। किसी पुल की मजबूती जानने के लिए उस पर अलग-अलग संख्या में वाहन चलाकर परीक्षण किया जा सकता है, लेकिन इंजीनियरिंग और गणित के जरिए डिजाइन के स्तर पर भी यह प्रमाणित किया जाता है कि वह निर्धारित भार और परिस्थितियों को सहन कर सकता है। कंप्यूटर सिस्टम में औपचारिक सत्यापन का विचार कुछ इसी तरह का है; मतलब सिर्फ परीक्षण नहीं, बल्कि गणितीय आधार पर सही होने की गारंटी स्थापित करने का प्रयास।
आज बैंकिंग, अस्पतालों, सरकारी सेवाओं और बड़ी कंपनियों का बड़ा हिस्सा डिजिटल और क्लाउड आधारित प्रणालियों पर निर्भर है। ऐसे में किसी सॉफ्टवेयर या सिस्टम की छोटी तकनीकी गड़बड़ी भी बड़े स्तर पर असर डाल सकती है। AWS का ऑटोमेटेड रीजनिंग ग्रुप ऐसे ही सिस्टमों की विश्वसनीयता और सुरक्षा से जुड़े सवालों पर काम करता है। अश्वनी का शोध खासकर उन जटिल सिस्टमों से संबंधित है, जिनमें कई हिस्से एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं। ऐसे सिस्टमों में यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होता है कि अलग-अलग हिस्सों की जटिल प्रक्रियाओं के बावजूद पूरा सिस्टम अपेक्षित तरीके से काम करे। सबसे बड़ी बात यह है कि अश्वनी के शोध-पत्र कंप्यूटर विज्ञान के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रकाशित हो चुके हैं। उनके शोध कार्य को दुनिया भर के अन्य शोधकर्ताओं ने भी अपने शोध में उद्धृत किया है। शोध-पत्रों का इस तरह उद्धृत होना बताता है कि दूसरे शोधकर्ताओं ने उनके काम को अपने अध्ययन और शोध के लिए उपयोगी पाया है। विज्ञान के प्रतिष्ठित मंचों तक पहुंच बनाने वाले अश्वनी अब अपने करियर के अगले पड़ाव पर हैं। AWS के लंदन स्थित ऑटोमेटेड रीजनिंग ग्रुप में उनकी नयी भूमिका उनके अब तक के शोध-सफर को व्यावहारिक तकनीकी दुनिया से जोड़ने वाली होगी।

बहरहाल, अश्विनी आनंद का फैमिली बैकग्राउंड भी काफी संघर्ष वाला रहा। उनके पिताजी गंगाराम सिंह काफी संघर्ष कर बैंक की नौकरी में आए थे। वे यूको बैंक से रिटायर किये हैं। अपने कार्यकाल के दौरान वे दो बार तारापुर विधानसभा क्षेत्र के संग्रामपुर में भी रहे। हालांकि, वे अपने कार्यकाल के दौरान तो बिहार के कई शहरों में बैंक की सेवा दी। लेकिन संग्रामपुर से गहरा संबंध रहा है। गंगाराम सिंह संग्रामपुर में 1985 से 2002 तथा 2011 से 2014 तक रहे थे। इसी दौरान उनके घर 15 मई 1998 को अश्विनी आनंद के रूप में बेटे का जन्म हुआ। गंगाराम सिंह ने मुखियाजी डॉट कॉम को एक भेंट में बताया कि यह खुशी की बात है कि उनका बेटा अश्विनी आनंद आज विदेश में अपनी सेवा देने को तैयार है। तारापुर के ही विधायक सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने की चर्चा पर वे कहते हैं कि जब मेरी पोस्टिंग संग्रामपुर में थी तो उस समय उनके पिता शकुनी चौधरी से अच्छा सामाजिक रिश्ता बन गया था। उनकी माँ पार्वती देवी से भी पारिवारिक स्तर पर मिलना-जुलना होता था। उन्होंने मेरे बेटे (अश्विनी आनंद) को अपनी गोद में दुलारा भी है। हालांकि, समय के साथ अब सब केवल यादों में रह गया है।









