Mukhiyajee | Reporter
पैक्सों में संचालित कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं को पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। राज्य में कुल 6301 कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) कार्यरत हैं। इसके जरिए पैक्सों ने अब तक 6 करोड़ रुपए से अधिक का व्यवसाय किया है। दूसरी ओर, बिहार के किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए भारत सरकार ने राज्य में धान अधिप्राप्ति की अंतिम तिथि का विस्तार कर 31 मार्च कर दिया है। गौरतलब है कि इसके लिए 16 फरवरी को बिहार की खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेशी सिंह ने भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के मंत्री प्रहलाद जोशी से मुलाकात कर ‘खरीफ विपणन मौसम 2025-26’ के तहत बिहार में धान अधिप्राप्ति की अंतिम तिथि बढ़ाने का अनुरोध किया था। मंत्री के अनुरोध को स्वीकार करते हुए भारत सरकार ने बिहार में धान अधिप्राप्ति की अंतिम तिथि 28 फरवरी से विस्तारित कर 31 मार्च तक करने की स्वीकृति प्रदान की है।

इस संबंध में मंत्री लेशी सिंह ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि धान अधिप्राप्ति की अवधि बढ़ाए जाने से अधिक से अधिक किसानों को अपना धान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने का अवसर मिलेगा। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि प्रत्येक पात्र किसान को इसका लाभ मिले। साथ ही, उन्होंने अधिकारियों को खरीद प्रक्रिया को सुचारु एवं पारदर्शी ढंग से संचालित करने का निर्देश दिया है। खरीफ विपणन मौसम 2025-26 अन्तर्गत प्रदत लक्ष्य 36.85 लाख मीट्रिक टन के विरूद्ध अब तक 6879 समितियों के माध्यम से 4.28 लाख किसानों से 29.22 लाख मीट्रिक टन धान की अधिप्राप्ति की गयी है, जो कि कुल लक्ष्य का 79.30 प्रतिशत है। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में 6400 करोड़ रुपये का भुगतान उनके खाते में किया जा चुका है।

उधर बिहार की खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेशी सिंह ने मीडिया को बताया कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। धान अधिप्राप्ति की अवधि बढ़ाए जाने से अधिक से अधिक किसानों को अपना धान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने का अवसर मिलेगा। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि प्रत्येक पात्र किसान को इसका लाभ मिले। उन्होंने धान अधिप्राप्ति की तिथि बढ़ाए जाने के निर्णय के लिए भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है। साथ ही अधिकारियों को अधिप्राप्ति प्रक्रिया को सुचारु एवं पारदर्शी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिया है।
उधर, पैक्सों में संचालित कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं को पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। राज्य में कुल 6301 कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) कार्यरत हैं। इसके जरिए पैक्सों ने अब तक 6 करोड़ रुपए से अधिक का व्यवसाय किया है। पैक्सों में कार्यरत ये कॉमन सर्विस सेंटर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बना रहे हैं। पैक्सों में कॉमन सर्विस सेंटर विकसित करने का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाना और किसानों को सरकारी योजना का लाभ सीधे उनके गांव में उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत पैक्स ग्रामीणों को बैंकिंग, बीमा आधार नामांकन, स्वास्थ्य सेवाएं, कानूनी सेवाएं, कृषि उपादान, पैन कार्ड, आईआरसीटीसी, रेल, बस, हवाई टिकट बुकिंग, आरटीपीएस पर उपलब्ध सेवाओं जैसी 300 से अधिक सेवाएं प्रदान कर कर रहे हैं। बहरहाल, सहकारिता विभाग प्रत्येक पैक्स को कॉमन सर्विस सेंटर से जोड़कर ग्रामीण समाज को डिजिटल रूप से सशक्त बना रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से बैंकिंग, बीमा, पेंशन तथा अन्य सरकारी सेवाएं अब किसानों और ग्रामीणों तक और भी आसान, पारदर्शी और तीव्र गति से पहुंच रही है। इससे न केवल पैक्सों की कार्यक्षमता और उपयोगिता बढ़ी है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नयी मजबूती भी मिल रही है।





