Rajesh Thakur । Patna
बिहार में अब गांव-कस्बों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना अधूरा नहीं रहेगा। पटना स्थित Bansal Classes ने कक्षा 8वीं से 10वीं तक के विद्यार्थियों के लिए NEET और JEE की तैयारी का विशेष कार्यक्रम शुरू किया है, ताकि गरीब और साधारण परिवारों के बच्चे भी आगे बढ़ सकें। यह जानकारी संस्थान के निदेशक अभिजीत सिंह ने बोरिंग रोड स्थित केंद्र पर पहुंचे पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री संजय पासवान को दी। उन्होंने यह भी कहा कि इतना ही नहीं, बिहार सहित अन्य बोर्ड्स के टॉपर स्टूडेंट्स को NEET-JEE की तैयारी मुफ्त में करायी जाएगी। पूर्व मंत्री के साथ समाजसेवी ऋतिक यादव और मुखियाजी ईपेपर व मुखियाजी वेबपोर्टल के संपादक राजेश ठाकुर भी मौजूद रहे।

दरअसल, अब तक अच्छे कोचिंग संस्थान दूर शहरों या कोटा जैसे स्थानों तक ही सीमित माने जाते थे। वहां पढ़ाई का खर्च, रहना-खाना और दूरी, सब कुछ गांव के लोगों के लिए मुश्किल था। इसी परेशानी को देखते हुए Bansal Classes ने पटना में ही ऐसी व्यवस्था शुरू की है, जहां कम खर्च में, सही पढ़ाई और सही मार्गदर्शन मिल सके। संस्थान निदेशक अभिजीत सिंह ने आगे बताया कि बच्चों को छोटी कक्षा से ही गणित, विज्ञान और सोचने-समझने की सही आदत सिखायी जाएगी। पढ़ाई आसान भाषा में होगी, समय-समय पर परीक्षा ली जाएगी और जो बच्चा कमजोर रहेगा, उसे अलग से समझाया जाएगा। मौके पर मौजूद केंद्र निदेशक सौरभ कुमार ने बताया कि यह सच है कि गांव के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, कमी है तो बस सही दिशा की। जानकारी के अभाव में न ही बच्चे और न ही उनके अभिवावक सही कोचिंग संस्थान का चयन कर पाते हैं, इसलिए सही कॉउंसलिंग बहुत जरूरी है। यदि समय पर मार्गदर्शन मिल जाए, तो वही बच्चा आगे चलकर बड़े शहरों और नामी संस्थानों में अपनी जगह बना सकता है। इस तरह की पहल से बिहार के गांवों के बच्चों को बाहर जाने की मजबूरी कम होगी और पटना धीरे-धीरे पढ़ाई का भरोसेमंद केंद्र बनता जाएगा।



इसके पहले संस्थान के बारे में पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान ने निदेशक से बारीकी से पढ़ाई के बारे में समझा। उन्होंने संस्थान में शिक्षा की गुणवत्ता को मेंटेन रखने की सलाह दी। इतना ही नहीं, उन्होंने पूरे मंत्रोच्चार के साथ विद्या की अधिष्ठात्री मां सरस्वती की आराधना की। बाद में उन्होंने JEE तथा NEET के क्लास रूम को देखा। संस्थान के टीचर ने उन्हें स्मार्ट क्लास की जानकारी दी। किस तरह स्मार्ट बोर्ड कार्य करता है, इसके बारे में बताया। ब्लैक बोर्ड पर जो पढ़ाया जाता है, वह सीधे PDF में चेंज हो जाता है, जिसे क्लास खत्म होने के बाद बच्चों के व्हाट्सअप या मेल पर भेज दिया जाता है, जो नोट्स के रूप में काम आ जाता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने संस्थान के सभी लोगों को शुभकामनाएं दी। इस मौके पर निदेशक और केंद्र निदेशक के अलावा दीपक कुमार, विश्वजीत कुमार, विवेक मिश्रा, गौरव कुमार, आनंद कुमार अन्य लोग मौजूद रहे।




