खेत में प्रकट हुए भगवान… एक हाथ में सुदर्शन चक्र तो दूसरे हाथ में शंख-गदा। चार हाथों वाली भगवान विष्णु की इस प्रतिमा के एक हाथ में पद्म भी है। यह प्रतिमा बिहार के नवादा जिले में मिली है। ग्रामीणों की मानें तो भगवान विष्णु की यह प्रतिमा गुप्तकाल की है। दरअसल, इसके पहले भी नवादा के वारिसलीगंज प्रखंड में भगवान विष्णु की कई प्रतिमाएं मिल चुकी हैं, ​जो गुप्तकाल की हैं। तीन फीट लंबी काले पत्थर की बनी यह प्रतिमा देखने में अद्भुत है। जानकारी मिलते ही मुहल्ले के लोग वहां पहुंंच गए। लेकिन खास बात रही कि ग्रामीणों ने इस दौरान फीजिकल डिस्टेंसिंग का भी पालन किया, ताकि कोरोना को लेकर कोई प्रॉब्लम नहीं हो।

वारिसलीगंज स्थित चैनपुरा गांव के सीताराम सिंह के खेत मिट्टी की खोदाई चल रही थी। इसी दौरान किसी ठोस वस्तु से जेसीबी मशीन टकरायी, देखा तो वह भगवान विष्णु की अद्भुत प्रतिमा थी। भगवान विष्णु की तीन फीट लंबी इस प्रतिमा के एक हाथ में शंख तो दूसरे हाथ में सुदर्शन चक्र था। इसी तरह अन्य दो हाथों में गदा व पद्म हैं। प्रतिमा के दाएं भू देवी और बाएं श्री देवी की प्रतिमा बनी है। विष्णु की प्रतिमा के इर्द-गिर्द छोटी-बड़ी करीब 16 प्रतिमाएं बनी हैं। जेसीबी से खोदाई के दौरान प्रतिमा का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसे सीमेंट से जोड़ा गया है।

खेत मेंं भगवान विष्णु की प्रतिमा मिलने की जानकारी मिलते ही चैनपुरा समेत आसपास के टोले-मुहल्ले के लोग दर्शन के लिए पहुंचने लगे। ग्रामीणों ने प्रतिमा को गांव की ठाकुरबाड़ी में प्रतिष्ठापित कर दिया। फीजिकल डिस्‍टेंसिंग का पालन करते हुए मुहल्ले के लोगों ने उसकी पूजा-अर्चना की। भजन-कीर्तन भी किये जा रहे हैं।
ग्रामीण प्रतिमा मिलने को काफी शुभ मान रहे हैं। गांव में उत्सव जैसा माहौल है। काले चमकीले पत्थर से बनी विष्णु की कलात्मक प्रतिमा गांव से पूर्व-दक्षिण में प्रशांत ईंट-भट्ठे के लिए एक जेसीबी देर शाम ग्रामीण सीताराम सिंह के खेत से मिट्टी निकालने के दौरान मिली।

ग्रामीणों के अनुसार, भगवान विष्णु की यह प्रतिमा गुप्तकालीन हो सकती है। लोग कहते हैं कि वारिसलीगंज प्रखंड में इसके पहले मकनपुर, महरथ, ठेरा, अपसढ़ व कोरमा में इसी तरह की प्रतिमा मिली थी। अब चैनपुरा में विष्णु अवतार की प्रतिमा मिली है। पहले की मिली हुई सभी प्रतिमाएं गुप्तकालीन हैं। ऐसे में चैनपुरा में मिली प्रतिमा भी गुप्तकालीन हो सकती है।

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