PATNA (RAJESH THAKUR) : बिहार पॉलिटिक्स के भीष्म पितामह कहे जाने वाले शकुनी चौधरी आज 4 जनवरी को 88 साल के हो गए। राजनीति से संन्यास लेने के लगभग 8 साल के बाद भी अघोषित रूप से आज भी राजनीति पर पकड़ है। खासकर, पूर्व बिहार (भागलपुर जोन) के तमाम नेता उन्हें अपना गार्जियन मानते हैं। यही वजह रही कि तारापुर उपचुनाव में एनडीए और महागठबंधन, दोनों ही गठबंधन के उम्मीदवार शकुनी चौधरी से बढ़-चढ़ कर आशीर्वाद ले रहे थे।

पूर्व बिहार के काफी लोकप्रिय नेता रहे शकुनी चौधरी का राजनीतिक जीवन भी काफी लंबा रहा है। उनके राजनीतिक जीवन का सफर विधायक से शुरू हुआ है। वे अपने राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। वे बिहार सरकार में मंत्री से लेकर विधानसभा उपाध्यक्ष तक रहे और खगड़िया से सांसद भी रहे हैं।

अपने 88 साल की उम्र में शकुनी चौधरी लगभग 35 साल तक सक्रिय राजनीति में रहे और उन्होंने 2015 में संन्यास लेने की घोषणा की थी। राजनीति में आने से पहले वे 15 साल तक सेना की नौकरी में रहे थे। वे वर्ष 1985 में पहली बार विधायक बने और इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखे। वे सात बार विधायक और एक बार सांसद बने।

इसी दौरान राजद शासन में शकुनी चौधरी बिहार बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष भी बने। उनकी पत्नी पार्वती देवी भी एक बार विधायक बनी थीं। हालांकि, पार्वती देवी का लगभग डेढ़ साल पहले निधन हो गया था। उनके छोटे पुत्र सम्राट चौधरी वर्तमान में जिला पार्षद हैं तथा बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हैं। बिहार में सबसे कम उम्र के मंत्री बनने का रिकॉर्ड सम्राट चौधरी के ही नाम है। शकुनी चौधरी के बड़े बेटे रोहित चौधरी भी सक्रिय राजनीति में हैं।

कांग्रेस से अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले शकुनी चौधरी की गिनती समता पार्टी के संस्थापक सदस्य के रूप में होती है। जदयू के गठन में भी उनका अहम रोल है। हम पार्टी के गठन में भी उन्होंने अहम रोल निभाया था। वे राजद में भी काफी दिनों तक रहे थे। एक समय था, जब राजद सुप्रीमो लालू यादव और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनका निकट का संबंध था। आज भी दोनों उन्हें खूब मानते हैं। बता दें कि शकुनी चौधरी का जन्म 4 जनवरी 1936 को तारापुर के लखनपुर गांव में हुआ था। कुशवाहा समाज से आने वाले शकुनी चौधरी की तूती आज भी इलाके में बोलती है। 88वें जन्मदिन पर उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। 

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