DELHI (MR) : सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक नहीं रहे। आज 15 अगस्त को जब खबर फैली तो एकबारगी लोग भौंचक रह गए। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था। लेकिन यह दुखद सूचना सच निकली। दिल्ली स्थित अपने कार्यालय में झंडोत्तोलन के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। 

बताया जा रहा है कि बिंदेश्वर पाठक की तबीयत सुलभ इंटरनेशनल के केंद्रीय कार्यालय में झंडोत्तोलन के बाद अचानक बिगड़ गई और उन्हें एम्स में भर्ती करवाया गया। लेकिन, डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

बता दें कि बिंदेश्वर पाठक दो दिनों पहले ही पटना आए थे। वे एक कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे थे। मालूम हो कि बिंदेश्वर पाठक ने वर्ष 1970 में सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस ऑर्गनाइजेशन की स्थापना कर पूरे देश में सामाजिक क्रांति ला दी थी। उनकी पहचान बड़े भारतीय समाज सुधारकों में थी।

उन्होंने सुलभ इंटरनेशनल की स्थापना की, जो मानव अधिकारों, पर्यावरण स्वच्छता, ऊर्जा के गैर-पारंपरिक स्रोतों, अपशिष्ट प्रबंधन और सामाजिक सुधारों को बढ़ावा देने के लिए काम करती है। उन्होंने सुलभ शौचालयों को किण्वन संयंत्रों से जोड़कर बायोगैस निर्माण का अभिनव उपयोग किया, जिसे उन्होंने तीन दशक पहले डिजाइन किया था।

वे दुनिया भर के विकासशील देशों में स्वच्छता के लिए एक पर्याय बन गए थे। उनके अग्रणी काम, विशेष रूप से स्वच्छता और स्वच्छता के क्षेत्र में, उन्हें विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं। उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री से नवाजा था।

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